Friday, December 9

गोबर खरीदी, इस माह गौठानों में 6 हजार क्विंटल से ज्यादा की हुई खरीदी

गोबर खरीदी, इस माह गौठानों में 6 हजार क्विंटल से ज्यादा की हुई खरीदी


कोरिया। कोरिया के गांवों के दैनिक जनजीवन को प्रेरणा बनाकर मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य शासन ने नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना की शुरूआत की जिसमें भूजल रिचार्जिंग जैसी महत्वपूर्ण अवधारणा शामिल है। इसी योजना को विस्तार देते हुए गोधन न्याय योजना की शुरूआत की गई। योजना के अंतर्गत जिले में किसानों एवं पशु पालकों से गोबर खरीदी की जा रही है। कलेक्टर श्री श्याम धावड़े के मार्गदर्शन में जिले में गोधन न्याय योजना का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस माह में 1 अक्टूबर से अब तक जिले में 12 सौ 12 विक्रेताओं से 6 हजार 21 क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। किसानों और पशुपालकों को हर 15 दिन में गोबर खरीदी का भुगतान किया जाता है। जिससे उन्हें माह के अंदर ही अतिरिक्त आय हो जाती है।

नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ के नगर पालिका अधिकारी ने बताया कि पशुपालक श्री बैजनाथ ने आज ही 40 किलो गोबर का विक्रय किया। इसी तरह श्री श्याम जयसवाल बताते हैं कि वे योजना के शुरूआत से ही गोबर बेच रहे हैं। अब तक वे 2 हजार 370 क्विंटल बेच चुके हैं जिससे उन्हें 4 लाख 74 हजार रुपये तक कमाई कर चुके हैं। पशुपालक अमित तिवारी भी योजना के तहत 1 हजार 452 क्विंटल गोबर बेच चुके हैं जिसके एवज में उन्हें 2 लाख 90 हजार 514 रुपये का भुगतान हुआ है।

वर्तमान में जिले में 136 गौठानों के माध्यम से गोबर ख?ीदी कि जा रही है। योजना को विस्तार देते हुए 1 नवंबर से 193 नवनिर्मित गौठानों में भी गोबर खरीदी शुरू की जाएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए ग्रामीण नागरिकों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया देने की मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप 20 जुलाई 2019 को हरेली पर्व के दिन से इस योजना की शुरूआत की गई है। किसानों और पशुपालकों से गोबर खरीदी की जा रही है। जिससे जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है।

गौठान बने हैं आजीविका के केंद्र गौठानों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियां संचालित की जा रही है। चप्पल निर्माण, पोल निर्माण, ट्री गॉर्ड, चौन लिंक फेंसिंग, सब्जी उत्पादन, फ्लाई ऐश ब्रिक्स निर्माण जैसे काम किये जा रहे हैं। इन रोजगार गतिविधियों से जुड़े स्व सहायता समूहों की महिलाएं आमदनी हासिल कर रही हैं।

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