Saturday, December 3

दिसंबर 2023 से श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन

दिसंबर 2023 से श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन


अयोध्या
 उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। इसकी नींव का काम नवंबर 2021 में पूरा होने की संभावना है और दिसंबर 2023 से श्रद्धालु यहां भगवान राम को समर्पित नए भव्य मंदिर में 'राम लला' के दर्शन कर सकेंगे। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता गोपाल अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण देख रहे हैं, वो साथ ही साथ, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के विश्वासपात्र भी हैं।

गोपाल ने आईएएनएस को बताया कि मंदिर का शिलान्यास करीब डेढ़ मीटर के बेड़ा का काम तेजी से चल रहा है। यह काम अगले 15 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा और इसी के साथ इस साल नवंबर में मंदिर के शिलान्यास का काम पूरा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट दिसंबर 2023 तक भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोलने की कोशिश कर रहे हैं, इससे पहले मंदिर के निर्माण को पूरा करने का उद्देश्य भगवान राम को यहां स्थापित करना है।

विहिप नेता ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि मंदिर की नींव का काम पूरा होने के बाद मिर्जापुर और बैंगलोर से ग्रेनाइट से बने मंदिर के पत्थरों के इस्तेमाल का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने मंदिर की नींव के निर्माण कार्य की जानकारी देते हुए कहा कि 40 फीट की गहराई तक निर्माण कार्य किया जा चुका है। वहां से रेत हटा दी गई है और बेड़ा का काम पूरा होने के बाद मंदिर की नींव का काम पूरा होने के करीब होगा।

मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों की जानकारी देते हुए विहिप नेता ने कहा कि ग्रेनाइट विशेष रूप से बैंगलोर से ले जाया जा रहा है। मंदिर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों को राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से भेजा गया है और इस तरह के और पत्थरों को यहां ले जाया जाएगा।

मंदिर की दीवार बनाने के लिए पत्थर राजस्थान के जोधपुर से मंगवाए गए हैं, मंदिर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थर राजस्थान के मकराना से विशेष रूप से भेजे गए हैं जबकि पत्थर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से भी लाए गए हैं।

मंदिर निर्माण के बारे में पूछे जाने पर गोपाल ने आईएएनएस को बताया कि मंदिर 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा होगा। मंदिर में कुल 5 शिखर होंगे (मंदिर की वास्तुकला में प्रयुक्त टॉवर) और सबसे ऊंचा 161 फीट ऊंचा होगा।

उन्होंने बताया कि यह मंदिर तीन मंजिल का होगा जिसमें 20-20 फीट की तीन मंजिलें और उसके बाद एक शिखर बनाया जाएगा।

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