Saturday, December 3

STP बंद कर गंगा में गिराया जा रहा नाले का पानी? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलब की जांच रिपोर्ट

STP बंद कर गंगा में गिराया जा रहा नाले का पानी? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलब की जांच रिपोर्ट


प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बायोरेमिडियन ट्रीटमेंट के बाद गंगा में गिरते नालों के पानी का सैंपल लेकर आईआईटी कानपुर व आईआईटी बीएचयू वाराणसी में जांच कराकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रात में गंदे नाले को गंगा में डालने व एसटीपी बंद रखने की अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव की शिकायत पर सैम्पल लेने के लिए एमिकस क्यूरी अरुण कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। टीम में मुख्य स्थायी अधिवक्ता जेएन मौर्य, केंद्र सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी, राज्य विधि अधिकारी मनु घिल्डियाल व अधिवक्ता चंदन शर्मा सदस्य होंगे। एडीएम सिटी के कोऑर्डिनेशन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम सैम्पल लेगी। बोर्ड की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अधिवक्ता एचएन त्रिपाठी के माध्यम से कोर्ट में पेश की जाएगी। आईआईटी की जांच रिपोर्ट महानिबंधक के माध्यम से पेश की जाएंगी। ताकि प्रदूषण पर रिपोर्ट की तुलना की जा सके।

जल निगम लखनऊ के प्रबंध निदेशक ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि प्रयागराज में 740 में से 48 नाले खुले हैं,10 अस्थायी रूप से टैप किए जाते हैं।शेष टैप किए गए हैं। नालों का पानी गंगा में सीधे जाने से रोका गया है। नाले गंगा में जाने से रोकने के लिए एक करोड़ की योजना दी गई है। एक माह में डीपीआर तैयार होगा। क्लीन गंगा राष्ट्रीय मिशन की अनुमति के बाद 24 महीने में प्रोजेक्ट पूरा होगा। कोर्ट ने कहा कि 20 फरवरी 2021 को पत्र लिखे आठ माह बीत गए।इसकी अद्यतन जानकारी दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पूर्णपीठ ने गंगा प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए दिया है।

सरकार और नगर निगम तालमेल से काम करे
प्रयागराज में विद्युत शवदाह गृहों की स्थिति पर पूर्ण पीठ ने कहा कि राज्य सरकार व नगर निगम आपसी तालमेल से कार्य करें। नगर आयुक्त शवदाह गृहों को चालू रखने के लिए पावर बैक अप रखें। साथ ही पेयजल, शौचालय आदि सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके अलावा नगर निगम व प्रयागराज विकास प्राधिकरण स्नान घाटों से शवदाह घाट दूर रखने की योजना तैयार कर उसे लागू करें।

सिचाई विभाग के एमडी से मांगा हलफनामा
एमिकस क्यूरी अरुण कुमार गुप्ता ने वाराणसी में गंगा पार नहर बनाने में बाढ़ के कारण जन-धन की बर्बादी का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे गंगा नदी का ईको सिस्टम गड़बड़ा सकता है। साथ ही ललिता घाट पर गंगा में दीवार बनाने व विश्वनाथ कॉरिडोर का मलवा उसमें डंप करने पर आपत्ति की। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग ने वाराणसी में करोडों खर्च कर गंगा पार पांच किमी लंबी 30 मीटर चौड़ी नहर बनाने और बाढ़ में ध्वस्त होने से जनता के धन की बर्बादी हुई। कोर्ट ने गंगा घाट की स्थिति व गंगा के ईको सिस्टम के प्रभावित होने के मुद्दे पर अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी से ब्योरा मांगा है और नहर के मुद्दे पर सिंचाई विभाग के प्रबंध निदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। साथ ही गंगा किनारे पक्के निर्माण पर वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व जिलाधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

पीडीए उपाध्यक्ष नव प्रयागम प्रोजेक्ट का प्लान पेश करें
एमिकस क्यूरी अरुण कुमार गुप्ता ने नैनी की नव प्रयागम योजना का मुद्दा उठाया और कहा कि हाईकोर्ट ने गंगा किनारे उच्चतम बाढ़ बिंदु से पांच सौ मीटर तक निर्माण पर रोक लगा रखी है। इस आदेश की जानकारी होने के बावजूद प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने यमुना पुल के पास आवासीय योजना बनाई है। इसकी अनुमति नहीं ली गई है। कोर्ट ने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को प्रोजेक्ट प्लान पेश‌ करने का निर्देश दिया है। सीनियर एडवोकेट अरुण कुमार गुप्ता ने प्राइवेट बिल्डरों द्वारा गंगा किनारे प्लाट बेचने पर प्राधिकरण की चुप्पी पर सवाल खड़े किए और कहा कि प्रतिबंधित एरिया में निर्माण हो रहा है। पीडीए आंख बंद कर बैठा है। इसपर कोर्ट ने पीडीए उपाध्यक्ष को सर्वे कराने का निर्देश दिया है और पूछा कि कितने निर्माण हाईकोर्ट के प्रतिबंध के विपरीत किए गए हैं। सर्वे में दोहरा मापदंड न अपनाने और सभी के साथ समान कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

पॉलीथिन बैग प्रतिबंधित कराने का निर्देश
प्रयागराज माघ मेला इंचार्ज ने बताया कि 15 जुलाई 2018 को अधिसूचना जारी कर 50 माइक्रान के प्लास्टिक बैग निर्माण, बिक्री, प्रयोग, वितरण, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट आदि को प्रतिबंधित किया गया है। दो अक्तूबर 2018 से इसे लागू किया गया है। कोर्ट ने कमिश्नर को एडीएम रैंक के अधिकारियों की टीम बनाकर पुलिस की सहायता से बैन को लागू करने का निर्देश दिया है। कहा कि कमिश्नर खुद सुपरवाइज करें और 15 दिन पर रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने राज्य सरकार से हरिश्चंद्र शोध संस्थान छतनाग के निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है और पूछा कि निर्माण हाईकोर्ट के प्रतिबंध के विपरीत तो नहीं किया गया है।
 

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