Tuesday, November 29

Kitchen के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स

Kitchen के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स


आजकल वास्तु के संबंध में लोगों में काफी भ्रम एवं असमंजस की स्थिति है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। वास्तु शास्त्र का मूल आधार भूमि, जल, वायु एवं प्रकाश है जो जीवन के लिए अति आवश्यक है। इनमें असंतुलन होने से नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है। उदाहरण  के द्वारा इसे और स्पष्ट किया जा सकता है। सड़क पर बाएं ही क्यों चलते हैं क्योंकि सड़क के बाईं ओर चलना आवागमन का एक सरल नियम है। नियम का उल्लंघन होने पर दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है, इसी तरह वास्तु के नियमों का पालन न करने पर व्यक्ति विशेष का स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उसके रिश्ते पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वास्तु में रसोई घर के कुछ निर्धारित स्थान दिए गए हैं, इसलिए हमें रसोई घर वहीं पर बनाना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर, चिमनी, धुएं की चिमनी आदि मकान के विशेष भाग में निर्धारित की जाती है, ताकि हवा का वेग धुएं तथा खाने की गंध को अन्य कमरों में न फैलाए तथा इससे घर में रहने व काम करने वालों का स्वास्थ्य न बिगड़े। 

यदि रसोई घर नैऋत्य कोण में हो तो यहां रहने वाले हमेशा बीमार रहते हैं। घर में अग्नि वायव्य कोण में हो तो यहां रहने वालों का अक्सर झगड़ा होता रहता है। मन में शांति की कमी आती है और कई प्रकार की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

अग्नि उत्तर दिशा में हो तो यहां रहने वालों को धन हानि होती है। यदि अग्नि ईशान कोण में हो तो बीमारी और झगड़े अधिक होते हैं। साथ ही धन हानि और वंश वृद्धि में भी कमी होती है। घर में अग्नि मध्य भाग में हो तो यहां रहने वालों को हर प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

रसोई घर से कुआं सटा हुआ हो तो गृहस्वामिनी चंचल स्वभाव की होगी। अत्यधिक कार्य के बोझ से वह हमेशा थकी-मांदी रहेगी। 

किचन के लिए दक्षिण पूर्व क्षेत्र सर्वोत्तम रहता है। वैसे यह उत्तर-पश्चिम में भी बनाया जा सकता है। यदि घर में अग्नि आग्नेय कोण में हो तो यहां रहने वाले कभी भी बीमार नहीं होते। ये लोग हमेशा सुखी जीवन व्यतीत करते हैं।

रसोई घर हमेशा आग्नेय कोण, पूर्व दिशा में होना चाहिए या फिर इन दोनों के मध्य में होना चाहिए। वैसे तो रसोई घर के लिए उत्तम दिशा आग्नेय ही है।

वास्तु दोष को घर से दूर करने के लिए घर के द्वार के आगे वास्तुदोष नाशक हरे रंग के गणपति को स्थान दें। बाहर की दीवारों पर हल्का हरा या पीला रंग लगवाएं। मुख्य द्वार पर वास्तु मंगलकारी यंत्र लगाएं।

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