Tuesday, November 29

हिंदुत्व की विचारधारा सबको अपनत्व के भाव से देखती है: मुख्यमंत्री चौहान

हिंदुत्व की विचारधारा सबको अपनत्व के भाव से देखती है: मुख्यमंत्री चौहान


भोपाल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हिंदुत्व की विचारधारा व्यापक एवं अद्भुत है l यह सबको अपनत्व के भाव से देखती है और सारी दुनिया को एक परिवार की भांति मानती है। बचपन से ही हमें सिखाया गया है प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, धर्म की जय हो और अधर्म का नाश हो यह हिंदुत्व है। मुख्यमंत्री चौहान आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत  निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग में आयोजित समारोह में जे. नंदकुमार की पुस्तक “हिंदुत्व  फॉर द चेंजिंग टाइम्स” का विमोचन कर रहे थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हिंदुत्व की प्राचीन परंपरा है। हिंदुत्व हमेशा प्रासंगिक रहा है और हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व ने देश को ही नहीं बल्कि सारी दुनिया को व्यापक विचारधारा दी है । चाहे कोई व्यक्ति साकार हो या निराकार हो सभी के विचार हिंदुत्व में समाहित हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा हम बचपन से ही बच्चों को घुट्टी पिलाते हैं विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो। उन्होंने कहा कि प्रकृति को भी आत्म-भाव से देखो। पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, जीव-जंतु, नदी, समुद्र, पर्वत और पहाड़ आदि सभी में समस्त जड़ और चेतन में हिंदुत्व है। हर एक आत्मा में परमात्मा का अंश है, जो दिखाई नहीं देता लेकिन साधना से संभव है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रकृति की पूजा करने से ही हम बच सकते हैं । यदि इसी तरह प्रकृति का शोषण करते रहे तो इसके दूरगामी प्रभाव भयानक होंगे। इसलिए प्रकृति का दोहन करो लेकिन शोषण नहीं करो। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रकृति का शोषण हमें रोकना होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर दुनिया थर्रा रही है और पर्यावरण बचाने की बात कर रही है। भगवान कृष्ण ने हजारों साल पहले गोवर्धन पर्वत उठाकर संदेश दे दिया था कि प्रकृति को पूजो। ये बचेगी तो तुम बचोगे। पेड़ों की पूजा करो, प्रकृति को भी आत्म-भाव से देखो। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गौ-माता को पूजने के पीछे भी हमारी दृष्टि है कि प्राणियों को भी अपनत्व के भाव से देखो। नदियों को माता कहने और उनकी पूजा करने के पीछे भी यही भाव छिपा हुआ है। यह प्रकृति सबकी है।  

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा हिंदुत्व नाभि में अमृत के समान है। हिंदुत्व के कारण ही हमारी संस्कृति दुनिया में अमिट है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में हम वैश्विक महामारी कोरोना की विषम परिस्थितियों से निपटने में कामयाब हुए हैं।

प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक एवं पुस्तक के लेखक जे. नंदकुमार ने कहा कि हिंदुत्व को शक्तिशाली बनाए बिना भारत शक्तिशाली नहीं बन सकता। भारत को भारत मानने का आधार भी हिंदुत्व है। उन्होंने कहा कि विश्व में बहुत बड़े पैमाने पर वैचारिक संघर्ष की लड़ाई चल रही है । हिंदुत्व को कमजोर करने वाली ताकतें इसके सामने नहीं टिक सकीं। हिंदुत्व  राजनीति से भिन्न है इससे हिंदुत्व का संबंध नहीं है। भारत में ही नहीं समूचे विश्व में हिंदुत्व की विचारधारा आगे बढ़ रही है।

निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर भरत शरण सिंह ने कहा कि हिंदुत्व सनातन संस्कृति है। प्रकृति और परमात्मा का अनुपालन ही हिंदुत्व है। इसके कारण ही भारत विश्व में किसी से पीछे नहीं है और विश्व का मार्गदर्शन करने में भी आगे है। स्वागत उद्बोधन देते हुए विश्वास चौहान ने कहा की पुस्तक में भारतीय परंपराओं एवं संस्कृति पर प्रकाश डाला गया है। हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है जिसको इस पुस्तक में विस्तार से वर्णित किया गया है। विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव और प्राध्यापक सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

 

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