Saturday, December 3

डीएपी के साथ यूरिया का भारी संकट, जिम्मेदार कह रहे भरपूर स्टाक

डीएपी के साथ यूरिया का भारी संकट, जिम्मेदार कह रहे भरपूर स्टाक


जबलपुर
मटर, चना एवं गेहूं की फसल की बोवनीके बीच पूरे जिले में डीएपी के साथ यूरिया का भारी संकट गहराने से किसानों की चिंता दिनों-दिन बढ़ने से खेतों में उम्मीदकी फसल लहलहाने से पहले मुरझा रहीहै। विपणन के गोदाम से लेकर डबल लॉक और सोसायटियों में ‘डीएपी’ नहींहैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। किसानों तकसरलता से उचित निर्धारित दाम में खादपहुंचाने के लिए कई विभाग कागजों मेंसक्रिय है, लेकिन यथास्थिति इससेबिल्कुल विपरीत है। खाद के लिए रोजडबल लॉक और सोसायटी पहुंच रहेकिसानों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि8 दिन के अंदर खाद का भारी स्टाक आरहा है, आप लोग चिंता न करें, बोवनीफिलहाल कुछ दिनों के लिए टाल दें।इंतजार खत्म ही नहीं हो रहाप्रदेश सरकार किसानों के लिए कृषियोजनाएं चलाने का दावा कर रही हैं, परजब किसानों को जरूरत होती है, तोसरकारी गोदामों में खाद का संकट आजाता है। मटर, चना और गेहूं की बुआईके समय किसानों को डीएपी-यूरिया केलिए परेशानी झेलना पड़ रही है। कुछकिसान जैसे-तैसे बुआई का काम कर रहेहैं, लेकिन 15 से 20 दिन के बाद फसलोंकी सिंचाई के समय यूरिया का संकटउनके सामने फिर खड़ा होगा। किसानोंको मिलने वाली खाद में कई कंपनियों कीखाद का वितरण होना है,जैसे इफको,आईपीएल, सरदार, नवरत्ना एवं कृभकोशामिल है। जिले में सिर्फ इफको कंपनीकी खाद् का वितरण सिर्फ प्राइवेट दुकानसे किया जा रहा,जबकि बाजार में सभीकंपनियों की खाद् की उपलब्धता है। सेवासहकारी समितियों में बैठे जिम्मेदार बीते8-10 दिन से खादआने का सिर्फ भरोसाही दिला रहे हैं।प्राइवेट में भरपूर स्टाक कैसेसरकारी गोदाम को छोड़कर प्राइवेट खाद्विक्रेताओं के पास डीएपी के साथ यूरिया काभरपूर स्टाक कैसे है। किसान निजी फर्म सेअधिक दाम देकर खाद् खरीद भी रहे हैं औरखाद-बीज का कारोबार करने वालेसिंडीकेट बनाकर किसानों को अमानकखाद् भी बेच रहे, जिसे देखने वालाफिलहाल कोई नहीं है। प्राइवेट डीलर सेकह रहे हैं कि अभी जिस कीमत में खादमिल रही है, खरीद लो आने वाले समय मेंखाद की भारी किल्लत होने वाली है।अफसर नहीं करते हैंमॉनिटरिंगखाद कि क्वालिटी, वजन और कीमतकी सत्त मॉनिटरिंग के लिए कृषिविस्तार अधिकारियों को इसकीजिम्मेदारी सौंपी गई है। पनागर,सिहोरा, पाटन, मझौली एवं शहपुराक्षेत्र में लाखों बोरी डीएपी और यूरियाकी खपत है। किसी भी अधिकारी नेआज तक ऐसा कोई प्रकरण नहींबनाया जिसकी क्वालिटी खराब हो याफिर निर्धारित वजन में कम हो। हजारोंटन खाद् विक्रय के बाद भी अभी तकएक भी केंद्र का न तो निरीक्षण हुआऔर न ही कार्रवाई।

परमिट काट दिए और नगद में बेच दी खाद
बोवनी आने के पूर्व किसानों ने सितम्बर माह में खाद के लिए संबंधितसोसायटी से कर्ज लेकर परमिट ले लिया था। कर्ज स्वरुप मिले परमिट में इसबात की गारंटी होती है कि अगर खाद की गोदाम में आवक होगी तो पहलेपरमिट लिए किसान को खाद का वितरण जाएगा। डबल लॉक से वितरण होनेवाली खाद को अधिकारियों ने नगद में पहले ही बेच दी। नगद ब्रिकी में किसानकी ऋण-पुस्तिका में खाद का उल्लेख कर वितरण किया गया, जिसका लाभव्यापारियों ने उठाते हुए स्टाक कर लिया। परमिट वाला किसान परमिट की पर्चीलेकर दर-दर भटक रहा है।

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