Saturday, November 26

लखीमपुर हिंसा : बैलेस्टिक रिपोर्ट में पुष्टि,आशीष-अंकित की गन से चली थीं गोलियां

लखीमपुर हिंसा : बैलेस्टिक रिपोर्ट में पुष्टि,आशीष-अंकित की गन से चली थीं गोलियां


  लखनऊ

लखीमपुर हिंसा मामले में फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में फायरिंग की पुष्टि हुई है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा और उसके करीबी अंकित दास के लाइसेंसी असलहा की बैलेस्टिक रिपोर्ट में फायरिंग की पुष्टि हुई है. इससे साफ हो गया है कि तिकुनिया में हिंसा के दौरान लाइसेंसी असलहे से फायरिंग भी की गई थी.

दरअसल, तिकुनिया हिंसा के दौरान किसानों ने बीजेपी नेताओं के द्वारा फायरिंग करने का मामला भी उठाया था. इसकी जांच के लिए लखीमपुर पुलिस ने अंकित दास की रिपीटर गन, पिस्टल और आशीष मिश्रा की राइफल और रिवॉल्वर को जब्त किया था और चारों असलहो की एफएसएल रिपोर्ट मांगी गई थी. रिपोर्ट में फायरिंग की पुष्टि हो गई है.

एफएसएल रिपोर्ट में साफ हो गया है कि आशीष मिश्रा के लाइसेंसी असलहे से फायरिंग की गई थी, लेकिन अभी साफ नहीं हो पाया है कि फायरिंग राइफल से हुई थी या रिवॉल्वर से. फिलहाल फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बाद अब आशीष मिश्रा और अंकित दास की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. फिलहाल दोनों जेल में बंद हैं.

क्या है पूरा मामला

3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में किसानों का एक समूह उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था, तभी तीन गाड़ियों के काफिले ने किसानों को कुचल दिया. इस हादसे में चार किसानों और एक पत्रकार की मौके पर मौत हो गई थी. गुस्साई भीड़ ने तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मार डाला था.

आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की मौजूदगी में गाड़ियों ने किसानों और पत्रकार को कुचला था. इसके साथ ही आरोप है कि बीजेपी नेताओं की ओर से फायरिंग भी की गई थी. इस मामले में लखीमपुर पुलिस ने आरोपी आशीष मिश्रा और उनके करीबियों को गिरफ्तार कर लिया था. फिलहाल सभी जेल में बंद हैं.

वहीं बीजेपी कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मारने के आरोप में कुछ किसानों को भी गिरफ्तार किया गया है. किसानों को कुचलने के इस मामले में काफी तूल पकड़ा और इस पर जमकर सियासत भी हुई. मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा, जहां कल (8 नवंबर) को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार भी लगी है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ-साफ कहा कि उसे मामले की जांच कर रही SIT टीम पर भरोसा नहीं है, इसलिए जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जज की नियुक्ति जरूरी है. इसके अलावा कोर्ट ने FIR में हो रहे घालमेल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि जांच दल खास आरोपी के बचाव में सबूत जुटा रहा है.

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