Saturday, December 3

16 घंटे से बच्चों के इंतजार में भटक रहे परिजन, बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा

16 घंटे से बच्चों के इंतजार में भटक रहे परिजन, बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा


भोपाल
हमीदिया अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल है और मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है। बच्चे सुरक्षित हैं यह खबर सुनने के लिए परिजन 16 घंटे से इंतजार कर रहे हैं। बच्चों की मौत को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। भानपुर के रहने वाले आमीन खान ने बताया कि पत्नी तरन्नूम को 4 दिन पहले बेटा हुआ था। पहले उन्हें बताया गया है कि बेटा ठीक है, लेकिन रात में बताया कि उसकी मौत हो चुकी है।  कल शाम तक बच्चा ठीक था। वह खाना लेने घर चले गए। जब लौटे तो वार्ड में आग लगी थी। घंटों तक डॉक्टर-कर्मचारी झूठ बोलते रहे कि उनका बेटा ठीक है, लेकिन रात ढाई बजे बच्चे की कमजोर होने की वजह से मौत होने की बात कहने लगे। बच्चा कमजोर नहीं था। आग लगने की वजह से उसकी मौत हुई है।

बागसेवनिया में रहने वाली पूनम ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि उनकी बेटी को काफी मन्नतों के बाद बेटा हुआ था। सोमवार को ही जन्म हुआ था। रात में वह, बेटी और नाती के पास थी। नर्स और वार्ड बॉय के बीच लड़ाई होने लगी। हम वार्ड से बाहर निकल गए। इसके पांच मिनट बाद ही आग लग गई। एक सिस्टर (नर्स) कह रही थी कि एक भी हंसते हुए नहीं, बल्कि रोते हुए जाएंगे। आग के पीछे बड़ी साजिश है।

नवजात बच्चों के लिए पीडिट्रिक वेंटिलेंटर पर बच्चों को रखा जाता है, लेकिन आग लगने से वेंटिलेटर खराब हो गए हैं। इसलिए हमीदिया अस्पताल से एडल्ट वेंटिलेंटर से काम चलाया जा रहा है। बच्चों को अस्पताल की दूसरी मंजिल पर शिफ्ट कर दिया गया है। बच्चों की हालत कैसी है, इसको लेकर प्रबंधन की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

जहांगीराबाद के रहने वाले रईस ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पत्नी सादमा को 12 दिन पहले बेटा हुआ था। वह कमला हॉस्पिटल में भर्ती था। रात में आग लगने से उसकी मौत होने की बात कही गई है। अस्पताल वालों की लापरवाही का नतीजा है। इसकी जांच हो चाहिए। अभी तक पत्नी को नहीं बताया कि हमारा बेटा अब जिंदा नहीं है।

सुबह करीब 11 बजे बजे पूर्व मंत्री व विधायक पीसी शर्मा और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अर्चना जायवाल अस्पताल पहुंची। जहां अस्पताल के अंदर जाने को लेकर कांग्रेसी नेता पुलिस से भिड़ गए। इसको लेकर जमकर दोनों पक्षों के बीच विवाद होता रहा, लेकिन उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया।

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