Saturday, December 3

कार्य नहीं वेतन नहीं के सिद्धांत पर प्रोफार्मा पदोन्नति

कार्य नहीं वेतन नहीं के सिद्धांत पर प्रोफार्मा पदोन्नति


भोपाल

सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण केस का फैसला नहीं हो पाने के बाद भी लोक निर्माण विभाग ने पांच साल से पदोन्नति पर लगी रोक से आहत इंजीनियर्स को राहत देने के लिए कार्य नहीं वेतन नहीं के सिद्धांत पर प्रोफार्मा पदोन्नति दिए जाने का निर्णय लिया है। इसके आधार पर आधा दर्जन वरिष्ठ अभियंताओं को पदोन्नति भी दी गई है। पुलिस विभाग में आरक्षक से निरीक्षक तक के कर्मचारियों को पदोन्नति देने के लिए कार्यवाहक व्यवस्था के बाद अब लोक निर्माण विभाग ने इसके आधार पर पदोन्नति देने की व्यवस्था शुरू की है।
विधि और विधायी कार्य विभाग से अभिमत लेने के बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा शुरू की गई इस नई व्यवस्था के अंतर्गत कार्यपालन यंत्री सिविल से अधीक्षण यंत्री सिविल के रिक्त पदों पर पदोन्नति समिति के निर्णय के आधार पर कार्यवाही शुरू की गई है। इस कैडर के इंजीनियरों को प्रोफार्मा पदोन्नति देते हुए उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से आगामी आदेश तक उन्हें प्रोफार्मा पदोन्नति दी गई है। यह प्रोफार्मा पदोन्नति अप्रेल 2016 में लिए गए निर्णय के आधार पर संबंधित तारीख से प्रभावी होगी। इस तरह इन्हें पांच साल का वेतन काल्पनिक रूप से देना माना जाएगा। इसके लिए किसी तरह का एरियर्स नहीं दिया जाएगा। जो कार्यपालन यंत्री इसके बाद सेवा निवृत्त हो चुकेहैं, उन्हें भी वेतन निर्धारण काल्पनिक रूप से किया जाएगा। यह प्रोफार्मा पदोन्नति राजेंद्र कुमार जैन, जिले सिंह बघेल, भगवान सिंह मीणा, चंद्रपाल सिंह, केशव सिंह यादव, रवेंद्र सिंह, आरएन मिश्रा को इस आधार पर दी गई है कि इनकी डीपीसी सुप्रीम कोर्ट में केस लगने के पहले हो गई थी पर उसे अमल में नहीं लाया गया था।

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