Thursday, July 25

साइबर सुरक्षा पर SCO देशों का दिल्ली में सेमिनार, चीन समेत कई देशों होंगे शामिल

साइबर सुरक्षा पर SCO देशों का दिल्ली में सेमिनार, चीन समेत कई देशों होंगे शामिल


नई दिल्ली
दिल्ली में आज से शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) साइबर सुरक्षा पर मंथन करेंगे। भारत इस अहम सेमिनार की मेजबानी कर रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस सेमिनार का आयोजन क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे (आरएटीएस) को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। बता दें कि आरएटीएस का कार्यालय उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में स्थित है। इसका गठन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शंघाई सहयोग संगठन में शामिल देशों के सहयोग के मकसद से किया गया था। इस अहम सेमिनार में चीन, रूस, तजाकिस्तान, उज्बेकिसान समेत अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

खास बात यह भी है कि इस अहम सेमिनार में पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी ढांचा (आरएटीएस) की रूपरेखा के तहत भारत द्वारा आयोजित इस साइबर सुरक्षा संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को यहां पहुंचा। पाकिस्तान के उच्चायोग ने कहा कि उसके प्रभारी उच्चायुक्त आफताब हसन खान ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत मिशन में किया।
    
भारत ने एससीओ और इसके क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे (आरएटीएस) के साथ अपने सुरक्षा-संबंधी सहयोग को गहरा करने में गहरी दिलचस्पी दिखायी है, जो विशेष रूप से सुरक्षा एवं रक्षा से संबंधित मुद्दों से संबंधित है। उच्चायोग ने सोमवार को ट्वीट किया, ''आज उच्चायोग में, प्रभारी उच्चायुक्त आफताब हसन खान ने 7-8 दिसंबर 2021 तक नयी दिल्ली में आयोजित होने वाली साइबर सुरक्षा संगोष्ठी में हिस्सा लेने आये पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।''
    
बयान में कहा गया, ''सेमिनार का आयोजन एससीओ-आरएटीएस के तत्वावधान में हो रहा है। मिशन के राजनयिकों ने भी मेहमानों से बातचीत की।'' पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा विभिन्न मुद्दों पर दोनों देशों के संबंधों में तनाव के बीच हो रही है। आठ देशों का शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के तौर पर उभरा है। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके स्थायी सदस्य बने।

एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में एक शिखर सम्मेलन में रूस, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा की गई थी। बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता कई सालों से बंद है। भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कह दिया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकता।

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