Saturday, December 2

फीस होने के बाद भी जमा नहीं कर पा रहे विद्यार्थी, छाया सैलरी का संकट

फीस होने के बाद भी जमा नहीं कर पा रहे विद्यार्थी, छाया सैलरी का संकट


भोपाल
प्रदेश के 1301 निजी और सरकारी कॉलेजों में छह लाख 58 हजार विद्यार्थियों के प्रवेश हुए हैं। स्टूडेंट्स ने फॉर्म भरते समय एक हजार या इससे कम फीस जमा की थी। लेकिन अभी तक शेष फीस जमा करने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए हैं। इसलिए बची हुई फीस जमा नहीं हो पा रही है। इसके अभाव में जहां निजी कॉलेजों की आर्थिक स्थिति चरमराने लगी है। वहीं सरकार कॉलेज के संचालित सेल्फ फायनेंस कोर्स पर संकट दिखने लगा है। पूरी फीस नहीं मिलने से निजी कॉलेज आॅनलाइन क्लासेस लेने वाले प्रोफेसरों को सैलरी देने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को सेल्फ फायनेंस के अतिथि विद्वानों के साथ लैब अटेंडर और अन्य स्टाफ को सैलरी निकालने में परेशानी हो रही है।

सरकारी कॉलेजों में जीरो प्रॉफिट पर सेल्फ फायनेंस कोर्स चलते हैं। इसलिए वर्तमान सत्र 2021-22 में उक्त कोर्स में सैलरी देने के लिए प्राचार्यों को पर्याप्त फीस ही नहीं मिली है। क्योंकि विभाग ने एक हजार रुपए फीस पर प्रवेश देने के आदेश दिए थे। फीस नहीं मिलने के दशा में विभाग सेल्फ फायनेंस कोर्स के खर्च कैसे वहन करेंगे। इस संबंध में विभाग ने अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। हालांकि प्राचार्य के जानभागीदारी या अन्य मदों से सैलरी देने की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन निजी कॉलेजों में सैलरी देने के लिए फीस के अलावा कोई साधन ही मौजूद नहीं हैं।

विभाग एक हजार के बाद शेष फीस को दो किस्तों में जमा करने की व्यवस्था करेगा। ये फीस विभाग जनवरी और फरवरी में जमा कराएगा। इससे कॉलेजों को आर्थिक संकट से उभारने की बात कही जा रही है।

सेल्फ फायनेंस से चलने वाले स्नातक (यूजी) में 25 और स्नातकोत्तर (पीजी) में दस से कम प्रवेश होने पर कॉलेज प्राचार्यों को परेशानी उठाना  पड़ेगी। क्योंकि उक्त से कम प्रवेश होने पर विभाग उन्हें आगामी सत्र में बंद कर देगा।  

कॉलेजों में विद्यार्थी अपनी शेष जमा करने के लिए कॉलेज पहुंच रहे हैं। विभाग ने फीस जमा करने को लेकर कोई साफ आदेश नहीं दिए हैं। इसलिए प्राचार्य उनकी फीस जमा नहीं कर रहे हैं। क्योंकि कई विद्यार्थियों ने तर्क दिया है कि वे अपने घर चले जाएंगे।

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