जबलपुर
सुप्रीम कोर्ट व NGT का आदेश दरकिनार कर दीपावली की रात जमकर हुई आतिशबाजी। कहां तो आतिशबाजी के लिए शाम आठ से रात 10 बजे तक का समय निर्धारित रहा, लेकिन पटाखे तो रात 10 बजे के बाद ही फूटने शुरू हुए और आधी रात के बाद तक पटाखों का शोर सुनाई देता रहा। आलम यह कि पटाखों के चलते पूरा वायुमंडल धुआं-धुआं हो गया। बहुतेरे ऐसे लोग मिले जिन्हें इस काले धुएं के चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगी। पटाखों की आवाज इतनी तेज थी कि कमरे के खिड़की-दरवाजे बंद होने के बाद भी शोर में कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था।
दीपावली की रात जमकर हुई आतिशबाजी
दीपावली पर हुई आतिशबाजी का खामियाजा ये रहा कि बारूद के कणों के चलते शहर की आबो-हवा बिगड़ गई। जानकारी के मुताबिक हवा में पीएम-2.5 का स्तर 486 तो, पीएम-10 का स्तर 449 प्रति घनमीटर तक पहुंच गया।
एयर क्वालिटी इंडेक्स की बात करें तो जिले में दीपावाली की रात से लेकर सुबह 9 बजे तक प्रदूषण का स्तर घातक स्तर पर पहुंच गया था। मढ़ाताल में स्थापित वायु प्रदूषण मॉनिटर सिस्टम पर गौर करें तो गुरुवार दीपावाली की शाम 6 बजे से लेकर शुक्रवार की सुबह 9 बजे तक हवाहवा प्रदूषित हो चली थी। हाल ये रहा कि भोर के तीन बजे शहर की आबोहवा सर्वाधिक प्रदूषित रही। आंकड़ों पर नजर डालें तो शाम छह बजे तक पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर प्रति घन मीटर 70 के आसपास रहा जो रात नौ बजे 352, रात 12 बजे 457 और देर रात तीन बजे 486 पर पहुंच गया था। इस तरह से शहर का एक्यूआई 247 पर रहा।
दरअसल इस बार पुलिस-प्रशासन की ओर से भी आतिशबाजी पर नियंत्रण का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। इसका परिणाम ये रहा कि ज्यादातर लोगों ने रात 10 बजे से जो पटाखा फोड़ना शुरू किया वो मध्य रात्रि के बाद तक जारी रहा। इसका परिणाम रहा कि शुक्रवार की सुबह सड़कें पटाखों के कचरे से पट गई थीं।

