जबलपुर
मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पीएम मोदी सरकार ने गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। इसमें प्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को सीधा लाभ मिलेगा। नक्सल प्रभावित बालाघाट के रेल परियोजना से जुड़ने से विकास के नए द्वार खुलेंगे।
सीएम मोहन यादव ने केंद्र सरकार व मोदी कैबिनेट द्वारा गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति देने की जानकारी साझा करते हुए खुशी जताई है। उन्होंने एक्स पर जानकारी देते हुए पीएम और रेल मंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण परियोजना को आधिकारिक स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने इस निर्णय को प्रदेश के लिए 'बड़ी सौगात' बताया है।
सेवातीर्थ में पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक
बता दें कि सेवातीर्थ में केन्द्र सरकार की पहली केबिनेट बैठक में आयोजित हुई। इसमें गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है। इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा। केंद्र ने इस रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। जाहिर है इस परियोजना के पूरे होने के बाद एमपी के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
नक्सल मुक्त बालाघाट को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि नक्सल समस्या से मुक्त हो चुके बालाघाट जिले के लिए यह परियोजना जीवनदायिनी साबित होगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यहां न केवल व्यापार और व्यवसाय बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज, मेजर और माईनर ब्रिज बनेंगे
करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रुपए से 5 साल में पूरा होगा। जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा। वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे। साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे।
परियोजना में एमपी को क्या-क्या मिलेगा, एक नजर
- रामायण सर्किट में नार्थ से साउथ तक का कॉरीडोर बनेगा है
- परियोजना की कुल लागत 5,236 करोड़ रुपए
- रेल दोहरीकरण में लगभग 231 किलोमीटर लम्बाई पर काम होगा
- परियोजनाओं को 5 वर्ष में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया
- एमपी के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को मिलेगा लाभ
- 450 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास और फेसिंग में खर्च

