Wednesday, March 25

झारखंड में शिशु मृत्यु दर पर रोक की तैयारी: सरकार 60+ NBSU यूनिट्स खोलेगी

झारखंड में शिशु मृत्यु दर पर रोक की तैयारी: सरकार 60+ NBSU यूनिट्स खोलेगी


मेदिनी नगर/पलामू.

झारखंड में शिशु मृत्यु दर अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर 1000 जीवित जन्म पर करीब 25 नवजातों की मौत हो रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के 60 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने का फैसला किया है।

इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले जन्म, कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी जैसे कारणों से अधिकांश नवजातों की मौत जीवन के पहले सप्ताह में ही हो जाती है। ऐसे में यदि जन्म के तुरंत बाद ही विशेष निगरानी और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनबीएसयू को अस्पतालों के मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के पास स्थापित किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में नवजात को बिना समय गंवाए तत्काल उपचार मिल सके। इससे गंभीर स्थिति वाले बच्चों के इलाज में देरी नहीं होगी और रेफरल पर निर्भरता भी कम होगी।

एमएमसीएच में रोज पहुंचते हैं 10 गंभीर नवजात
मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में प्रतिदिन औसतन 10 गंभीर नवजात उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां स्थित एसएनसीयू में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन कई बार मरीजों के देर से पहुंचने के कारण डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद नवजातों को बचाना मुश्किल हो जाता है। यहां आने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आते हैं।

आधुनिक उपकरणों से लैस होंगी इकाईयां
प्रस्तावित एनबीएसयू को रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके साथ ही संक्रमण नियंत्रण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की विशेष व्यवस्था भी होगी, जिससे संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। पलामू जिले में फिलहाल हुसैनाबाद और छत्तरपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में एनबीएसयू संचालित है, लेकिन जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन केंद्रों में एनबीएसयू कब और कहां स्थापित होंगे, इसकी स्पष्ट घोषणा अभी तक नहीं हुई है।

गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा
राज्य सरकार ने 60 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने की घोषणा की है, लेकिन किन केंद्रों में यह सुविधा शुरू होगी, इसका स्पष्ट विवरण अभी नहीं दिया गया है। हालांकि, इस पहल से गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
– डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू

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