अंबाला.
राष्ट्रीय राजमार्ग 152- डी पर पुलिस को दो सीसीटीवी कैमरों से देश से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान पहुंचाई जा रही थी। यह दोनों सीसीटीवी सोलर सिस्टम से आपरेट किए जा रहे थे जबकि इनमें से एक में सिम भी चल रहा था। इन्हीं संदिग्ध सीसीटीवी कैमरों ने अब सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। करीब 50 दिन बाद अब इस मामले में सदर थाना पुलिस ने देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता व सुरक्षा को खतरे में डालने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला 26 फरवरी को सामने आया था तब तक पुलिस को यह लग रहा था कि शायद यह कैमरे किसी विभाग ने लगाए होंगे।
लेकिन करीब डेढ़ महीने की जांच और पूछताछ के बाद जब किसी भी विभाग द्वारा इन कैमरों की जिम्मेदारी नहीं ली गई तो पुलिस ने इसे गंभीर मानते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि इससे पहले मार्च माह में गांव मलौर में बिजली के खंभे पर सोलर और सिम से आपरेट होने वाले सीसीटीवी कैमरे बरामद हुए थे जिनसे एयरफोर्स स्टेशन बकनौर से जुड़ी जानकारी लीक करने का संदेह जताया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब आठ दिन पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा संचालित एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। अंबाला में भी इसी गैंग ने इन दोनों कैमरों को इंस्टाल किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि गिरोह के सदस्य सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों समेत अन्य संवेदनशील स्थानों की लोकेशन, फोटो, वीडियो पाकिस्तान भेज रहे थे। इन लोगों ने दिल्ली कैंट, अंबाला और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सोलर बेस्ड कैमरे भी लगाए थे। इन कैमरों की फीड पाकिस्तान दी गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस अभी तक 26 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ऐसे हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार एएसआइ रविश कुमार, जो उस समय थाना सदर थाने में जांच अधिकारी के तौर पर तैनात थे, 26 फरवरी को एक सड़क हादसे के केस जोकि 15 फरवरी को दर्ज हुआ था की जांच के सिलसिले में गांव देवीनगर के पास नेशनल हाईवे-44 पर पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने हाईवे-152 के ओवरब्रिज पर दो कैमरे लगे हुए देखे, जो सामान्य निगरानी सिस्टम से अलग और संदिग्ध लगे। यह लकड़ी के तख्ते के सहारे अटैच किए गए थे। प्राथमिक स्तर पर इन कैमरों की पहचान के लिए उन्होंने टोल प्लाजा प्रबंधन से संपर्क किया।
टोल मैनेजर विनोद कुमार ने साफ कहा कि ये कैमरे टोल के नहीं हैं। इसके बाद ट्रैफिक थाना मोहड़ा के एसएचओ जोगिंद्र से बात की गई, उन्होंने भी ऐसे किसी कैमरे से इनकार कर दिया। मामला और गहराया जब नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) के अधिकारी ललित ने भी इन कैमरों से अपना कोई संबंध होने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईवे पर निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के कर्मचारियों और उनके अधिकारी तेजेंद्र पांडे से भी पूछताछ की गई, लेकिन वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिली।
कैमरों के बारे में यहां भी पुलिस ने की पूछताछ
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सैनीमाजरा टोल प्लाजा, आइटी सिस्टम, सर्विलांस, डेटा मैनेजमेंट और तकनीकी सपोर्ट और कंप्यूटर ब्रांच तक में अलग-अलग दिन जांच की, लेकिन सभी जगह से एक ही जवाब मिला कैमरे उनके नहीं हैं। कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद दोनों कैमरों को मौके से उतरवाकर थाना सदर अंबाला शहर में सुरक्षित रख लिया।
सोलर प्लेट और सिम के साथ जुड़े हुए थे कैमरे
जांच के दौरान एक कैमरे में सोलर प्लेट के साथ वोडाफोन कंपनी का सिम कार्ड मिला, जबकि दूसरे कैमरे में कोई सिम नहीं था। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि ये कैमरे किसी खुफिया निगरानी या फिर असामाजिक/देशद्रोही गतिविधियों के लिए लगाए गए हो सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला मानते हुए धारा 152 और 61 बीनएस के वीरवार रात केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल पुलिस ने कैमरों को कब्जे में लेकर उनकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। सिम कार्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन कैमरों का संचालन कौन कर रहा था और इसका डेटा कहां जा रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली जा सकती है। यह मामला हाईवे सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
दिल्ली पुलिस के पकड़े गए आरोपितों से कनेक्शन
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए आरोपितों से ही अंबाला में लगे सीसीटीवी कैमरों का कनेक्शन जुड़ा है। दिल्ली पुलिस की पूछताछ खत्म होने के बाद आरोपितों को जल्द ही प्रोडक्शन वारंट पर अंबाला पुलिस लाएगी ताकि आरोपितों से पूछताछ की जा सके।
-अजीत सिंह शेखावत, एसपी अंबाला।

