Monday, May 11

बिहार में जमीन रजिस्ट्री से पहले मिलेगा पूरा रिकॉर्ड, 13 जानकारियों की होगी अनिवार्यता

बिहार में जमीन रजिस्ट्री से पहले मिलेगा पूरा रिकॉर्ड, 13 जानकारियों की होगी अनिवार्यता


पटना

बिहार में जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदारों को उस भूमि की पूरी जानकारी मिलेगी। राजस्व एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। रैयती जमीन के निबंधन से पहले पूरी जानकारी जल्द दी जाएगी। यह व्यवस्था इसी महीने शुरू होने जा रही है। राज्य के सभी अंचलाधिकारियों को भी इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जमीन निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार कर लिया गया है।

संभावना है कि इस सप्ताह के अंत तक या इस माह के अंत तक इसकी शुरूआत राज्य भर में हो जाएगी। जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी। सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।

जमीन के सौदे के समय देनी हैं ये जानकारियां
रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था के अनुसार जमीन का सौदा होने के बाद उसका निबंधन से पहले रैयती भूमि से जुड़ी 13 तरह की जानकारी सरकार को देनी होगी। निबंधन के लिए आवेदन के साथ खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी और विक्रेता की जानकारी आदि पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

सीओ करेंगे जांच
इस आवेदन के बाद अंचल अधिकारी जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और विक्रेता के दावों की जांच करेंगे। इसके बाद उसकी रिपोर्ट साझा की जाएगी। इसके लिए सरकार ने समयसीमा भी तय की है। बताया जा रहा है कि सीओ को 10 दिनों के भीतर यह रिपोर्ट देनी होगी।

नई व्यवस्था का क्या फायदा?
जमीन निबंधन से जुड़ी इस नई व्यवस्था से भूमि की खरीद-बिक्री में और पारदर्शिता आएगी। इससे जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे। खरीदार को रैयती जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले ही उससे जुड़ी सभी जानकारी मिल जाएगी। अगर उस जमीन पर पहले से कोई लोन है या विवाद है तो पता चल जाएगा।

क्या है जमीन निबंधन
जब आप कोई जमीन खरीदते हैं तो उसकी सेल डीड को सरकार के पास पंजीकृत करवाना होता है। जमीन की कीमत के अनुसार उसका रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी की राशि जमा करानी होती है। बिहार सरकार ने जमीन निबंधन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस ई निबंधन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। रजिस्ट्री होने के बाद जमीन का दावा कानूनी तौर पर नए मालिक का माना जाता है और यह रिकॉर्ड भू‑सर्वेक्षण और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *