Saturday, June 27

चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में बदलाव की मांग, FAR बढ़ाने और नियम आसान करने पर जोर

चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में बदलाव की मांग, FAR बढ़ाने और नियम आसान करने पर जोर


चंडीगढ़ 

चंडीगढ़ के उद्योग संगठनों ने मास्टर प्लान-2031, औद्योगिक नियमों और लैंड यूज पॉलिसी में ऐसे बदलाव करने की मांग की है, जिससे उद्योगों को लाभ हो। सार्वजनिक सुनवाई के दौरान व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्क्रीनिंग कमेटी को अपने सुझाव दिए। 

उद्योग संगठनों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल कन्वर्टेड प्लॉट ओनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन चंदर वर्मा ने कहा कि अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) देने के लिए प्रशासन द्वारा रखी गई शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं। उनका कहना है कि शहर के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की क्षमता को आधार बनाकर FAR सीमित करना उचित नहीं है। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता है, तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसका बोझ उद्योगों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

उद्योग संगठनों ने मांग की है कि अतिरिक्त FAR के लिए ली जाने वाली फीस कम की जाए। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा में यह शुल्क कम है, इसलिए चंडीगढ़ में भी इसे घटाया जाए, ताकि यहां के उद्योग अन्य राज्यों के उद्योगों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कन्वर्टेड इंडस्ट्रियल प्लॉट को मिले अतिरिक्त FAR
व्यापार संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन औद्योगिक प्लॉटों का उपयोग बदला गया है, उन्हें अनिवार्य सर्विस एरिया के कारण होने वाले स्थान के नुकसान की भरपाई के लिए 0.50 अतिरिक्त FAR दिया जाए। साथ ही, फैक्ट्री परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास को कुल FAR की गणना से बाहर रखा जाए।

उद्योग संगठनों ने प्रशासन के उस प्रस्ताव का भी विरोध किया है, जिसमें अधिक FAR का लाभ लेने के लिए पुरानी इमारत को गिराकर दोबारा निर्माण करना अनिवार्य बताया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा इमारतों पर ही अतिरिक्त मंजिलें बनाने की अनुमति दी जाए और मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। इससे उद्योगों का समय और पैसों दोनों की बचत होगी।

ग्राउंड कवरेज और मिक्स्ड लैंड यूज में छूट की मांग
संगठनों ने सक्रिय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अधिक ग्राउंड कवरेज की अनुमति देने की मांग की है। इसके अलावा, फेज-3 की तरह फेज-1 और फेज-2 के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मिक्स्ड लैंड यूज की सुविधा लागू करने का सुझाव दिया गया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि अनिवार्य सेंट्रल कोर्टयार्ड (आंगन) जैसे नियमों से भवन का उपयोग प्रभावित होता है और उत्पादन क्षमता घटती है। इसलिए इन प्रावधानों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जाने चाहिए।

साथ ही, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या कब्जे के दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति रखने वालों को भी अतिरिक्त FAR का लाभ देने, MSME अधिनियम के तहत सभी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मान्यता देने तथा भवन उल्लंघन और मिसयूज से जुड़े लंबित नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अधिक FAR, कम शुल्क, मिक्स्ड लैंड यूज और सरल नियमों वाली संतुलित नीति लागू करता है, तो चंडीगढ़ में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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