लखनऊ
गंगा किनारे बसा गुन्नौर कई मायनों में अपनी खास पहचान रखता है। कभी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने इस सीट पर सबसे ज्यादा वोट का रिकॉर्ड बनाया था लेकिन धीरे-धीरे यह परिवार इस सीट से दूर हो गया। इस बार भी अखिलेश-शिवपाल के यहां से उतरने की चर्चा सिर्फ चर्चा बनकर ही रह गई। 2004 के उप चुनाव में गुन्नौर की जनता ने यहां से सपा नेता मुलायम सिंह यादव के नाम सबसे ज्यादा वोट से जीत का रिकॉर्ड दर्ज कराया तो 2017 के पासा पलटते हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी को जिताकर विधानसभा में भेज दिया।
इस बार गुन्नौर में मुलायम परिवार से पहले शिवपाल और फिर खुद अखिलेश के मैदान में उतरने की चर्चाएं तैरती रहीं। इलाके की जनता भी इस सीट की अहमियत फिर से बढ़ने का इंतजार करती रह गई लेकिन सीट न ही शिवपाल के खाते में आई और न ही अखिलेश ने इस पर दांव खेला। बदले हुए हालात में भाजपा फिर से इस सीट पर अपनी जीत दोहराने के लिए दम लगा रही है तो सपा अपना किला वापस लेने जद्दोजहद में है। मतदाताओं की चुप्पी दोनों ही दलों का तनाव बढ़ा रही है।

