Tuesday, October 20

वन विभाग: अब MP में हो सकेगी सैंपल की जांच, शिकारियों को सजा दिलवाने में आसानी

वन विभाग: अब MP में हो सकेगी सैंपल की जांच, शिकारियों को सजा दिलवाने में आसानी


भोपाल
वन विभाग को वन्यप्राणियों की जांच के लिए अब सैंपल हैदराबाद या फिर देश के दूसरे शहर में नहीं भेजने पड़ेंगे। जबलपुर के नानाजी देशमुख वेटनरी विश्वविद्यालय की वन्य प्राणी फोरेंसिक एवं वन्य प्राणी नैदानिक लैब को राज्य स्तरीय प्रयोगशाला की मान्यता प्रदान कर दी गई है। अभी तक इस तरह की लैब मध्य प्रदेश में नहीं थी। ऐसे में जांच के सैंपल प्रदेश के बाहर भेजने पड़ते थे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में अब वन्य प्राणियों से जुड़े अपराधों की जांच और कानूनी करवाई में भी आसानी होगी।

गौरतलब है कि, प्रदेश में प्रमुख रूप से बाघ, हाथी, तेंदुआ, नेवला, कछुए, हिरन, चीतल, पैंगोलिन, किंग कोबरा, गेंडा जैसे जीव-जंतुओं का अवैध रूप से तेजी से शिकार हो रहा है। लेकिन सही समय पर सबूत ना मिलने से अपराधियों को सजा दिलाने में वन विभाग नाकाम हो जाता है।

दूसरे राज्यों को भी मिलेगा लाभ
लैब में करीब 150 के लगभग वन्य प्राणियों के सभी तरह के सैम्पल जांच के लिए आते हैं। लैब के माध्यम से वन्य प्राणी की मौत, बीमारी, नस्ल की पहचान की जाती है। आने वाले समय में सैम्पलों की संख्या में 2 से 3 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है। लैब को मान्यता मिलने से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि आसपास के राज्यों से भी सैंपल आने शुरू हो गए हैं।

ये हैं हाल
जानकारी के अनुसार साल 2021 बाघों के लिए काफी बुरा साबित हुआ। एमपी ने अपने 44 से अधिक बाघों को खो दिया। यह प्रदेश में पिछले 10 साल में मरे बाघों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इनमें से आठ मामले शिकार एवं चार बाघ के अंगों की जब्ती के हैं। वहीं 22 तेंदुओं का भी शिकार हुआ है। इनमें से तीन मामलों में खाल, नाखून, दांत जब्त किए गए, जबकि शेष मामलों में तेंदुआ का शव जब्त किया गया है।

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