Monday, January 19

हिजाब विवाद: कर्नाटक के स्कूल-कॉलेज की बदलती तस्वीर, अब जंग में जुटे पहले साथ पढ़ने वाले

हिजाब विवाद: कर्नाटक के स्कूल-कॉलेज की बदलती तस्वीर, अब जंग में जुटे पहले साथ पढ़ने वाले


उडुपी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य प्रथा नहीं है। साथ ही कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में वर्दी को लेकर राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा और हिजाब प्रतिबंध का समर्थन किया है। अब तीन न्यायाधीशों की बेंच की तरफ से सुनाए गए इस फैसले का असर उडुपी के उस संस्थान में साफ देखा जा सकता है, जहां से यह पूरा विवाद शुरू हुआ। हालात बता रहे हैं कि सालों से एक-दूसरे के साथ चलने वाले छात्रों के रिश्तों में भी एक लंबी दरार आ गई है।

उडुपी के गर्ल्स प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में अब छात्रों को देखकर आसानी से बताया जा सकता है कि कौन किस पक्ष के साथ है। वहीं, हिजाब पहने और भगवाधारी छात्रों के बीच तनाव शहर की कहानियों में दर्ज हो चुका है, जिसकी गूंज आने वाली पीढ़ियों को भी सुनाई देगी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद छात्राओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक आलिया असदी बताती हैं, 'हम हाईकोर्ट क्यों गए, क्योंकि हम हिजाब और क्लास में बैठना चाहते थे। हमें बहुत उम्मीदें थी कि हाईकोर्ट में न्याय मिलेगा, लेकिन दुर्भाग्य से नहीं मिला। हम हिजाब के बगैर क्लास में नहीं जाएंगे।' असदी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की छात्रा भी हैं। वे वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर बनना चाहती हैं। वहीं, शफा कार्डियो टेक्नीशियन और एएच अलमास का सपना पायलट बनने का है। ये तीनों छात्राएं ही हिजाब विवाद के बीच 'विरोध' की आवाज बनी।
 

फरवरी की शुरुआत से ही ये छात्राएं कॉलेज के बाहर बैठी हुई हैं और छूटती हुई पढ़ाई और दोस्तों के साथ कदम मिलाने की कोशिश में हैं। हालांकि, मौजूदा तस्वीर बताती है कि अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही। उनके साथ यहां कॉलेज की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी मौजूद हैं। उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटों बाद ही यादगीर स्थित केमबावी शासकीय पीयू कॉलेज में विरोध के सुर उठे। यहां छात्राओं ने हिजाब के साथ एंट्री नहीं मिलने पर कक्षाओं का बहिष्कार किया। बहरहाल, यही स्थिति राज्य के कई संस्थानों की है, जहां मुस्लिम छात्राएं गेट के बाहर प्रदर्शन में जुटी हुई हैं।

बातचीत में उडुपी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष रघुपति भट ने कहा, 'मैंने मीडिया के जरिए जनता से अपील की थी कि सभी 6 छात्राएं कक्षा में लौटें और कोई भेदभाव नहीं होगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि गैप को पूरा करने के लिए उन्हें नोट्स दिए जाएं।' उन्होंने कहा, 'वे सुप्रीम कोर्ट जा सकती हैं, लेकिन तब तक वे कक्षा में शामिल हो सकती हैं, जहां केवल क्लास में उन्हें हिजाब नहीं पहनना चाहिए।' खास बात है कि सीडीसी की तरफ से 1 जनवरी को आदेश जारी किया गया था, जिसमें कक्षा के अंदर हिजाब प्रतिबंध करने की बात कही गई थी। तब से ही छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच तनाव जारी है।

8 फरवरी को महात्मा गांधी मेमोरियल कॉलेज में हिजाब पहने और भगवाधारी छात्रों के बीच हुए तनाव की तस्वीरें स्थानीय लोगों के सामने आज भी ताजा हैं। यह कॉलेज हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक स्थल श्री कृष्ण मठ से लगभग 2 किमी की दूरी पर ही है। वहीं, दूसरी ओर मणिपाल यूनिवर्सिटी शहर भी है, जहां इस विवाद की असर कम ही देखा गया। उडुपी जिले के कुंडापुरा तालुका स्थित श्री वेंकटरमन कॉलेज के छात्र आयुष पुजारी बताते हैं, 'जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था, लेकिन यह हो चुका है।' उन्होंने कहा, 'मैं मानता हूं कि झगड़े के समय कुछ गलतफहमियां थी, लेकिन उम्मीद है कि हमें इससे आगे बढ़ सकते हैं।' खबर दी थी कि हिजाब पहनी हुई लड़कियों की तरफ से शुरू हुए विरोध और उसके जवाब में भगवाधारियों की प्रतिक्रिया में संदिग्ध रूप से सांप्रदायिक संगठनों की भूमिका भी है। वहीं, उडुपी में शासकीय कॉलेज के छात्रों ने खुलकर इस बात को स्वीकार किया था कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के छात्र मोर्चा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया की तरफ से उन्हें समर्थन मिल रहा है।

 कैसे बजरंग दल और हिंदू जागरण वेदिके ने हिंदू समुदाय के छात्रों को विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार किया था। राज्य के इन हिस्सों में लाखों छात्रों की जान लेने वाली यह सियासी और धार्मिक जंग अब स्कूल और कॉलेजों के ग्राउंड्स पर चल रही है। औसतन 83 फीसदी साक्षरता वाले उडुपी में छात्र शायद यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनके कामों का प्रभाव कितनी दूर तक जा सकता है।

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