Monday, January 19

लाउडस्पीकरों को उतारने के लिए कोई कानून नहीं, केंद्र सरकार तय करे नियम: महाराष्ट्र

लाउडस्पीकरों को उतारने के लिए कोई कानून नहीं, केंद्र सरकार तय करे नियम: महाराष्ट्र


मुंबई
 
मस्जिदों में लाउडस्पीकर को लेकर उपजे विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर 'नियम बनाने और स्पष्टता लाने' की जिम्मेदारी केंद्र पर डाल दी। सर्वदलीय बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, राज्य के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल और पर्यावरण एवं पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि 'लाउडस्पीकरों को उतारने' में राज्य की कोई भूमिका नहीं है।

वाल्से पाटिल ने कहा, "राज्य लाउडस्पीकरों को उतारने या उन्हें लगाने पर कोई निर्णय नहीं ले सकता है। जो कोई भी लाउडस्पीकर लगा रहा है, उसे इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।" मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग करने वाली भाजपा और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुई।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री और आदित्य ठाकरे ने कहा कि 2005 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरे देश से संबंधित है, इसलिए इस मुद्दे पर केंद्र को फैसला करना चाहिए। वाल्से पाटिल ने कहा, "केंद्र को इस मुद्दे पर अंतिम विचार करना चाहिए। एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल स्पष्टीकरण के लिए केंद्र से मुलाकात करेगा और अन्य राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नीति की जांच करेगा। लाउडस्पीकरों को उतारने के लिए कोई कानून नहीं है।"

 
पाटिल ने कहा कि अगर राज्य लाउडस्पीकर के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो उसे सभी समुदायों द्वारा इसके इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा, "ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह-सुबह भजन और कीर्तन होते हैं, नवरात्रि और गणेश उत्सव के लिए भी लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया जाता है। हमने चर्चा की कि इसका क्या प्रभाव होगा, कानून व्यवस्था सभी के लिए समान है, हम दूसरों (अन्य समुदाय) के लिए अलग दृष्टिकोण नहीं ले सकते हैं।" उन्होंने कहा कि पुलिस हाई डेसिबल लेवल की शिकायतों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

 

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