ग्वालियर
लालटिपारा स्थित प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला आने वाले समय में बायो सीएनजी का भी उत्पादन करेगी। सूबे की आर्दश गौशाला के रुप में पहचान बना चुका गौसेवा का यह अनूठा प्रकल्प बायो सीएनजी का उत्पादन शुरु होने पर काफी हद तक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने लगेगा। गौरतलब है कि इस परिसर में पहले से ही कई अन्य गौ उत्पादों पर काम किया जा रहा है।
गौशाला परिसर में बायो सीएनजी प्लांट स्थापित करने के लिए इंडियन आॅयल कंपनी के अधिकारियों के एक दल ने गत दिवस ग्वालियर पहुंचकर गौशाला परिसर में सर्वे किया। इस सिलसिले में कंपनी द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान गौशाला का प्रबंधन कर रहे श्रीकृष्णायन गौशाला के संत ऋषभ देवाानंद महाराज, नोडल अधिकारी गौशाला पवन सिंघल सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। माना जा रहा है कि नगर निगम द्वारा संचालित लालटिपारा आर्दश गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।
डेयरियों का गोबर और सब्जी मंडी का कचरा आएगा काम
इस प्लांट में गौशाला से निकलने वाले गोबर के साथ ही शहर की पशु डेयरियों से निकलने वाला प्रतिदिन का गोबर और सब्जी मंडी से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग किया जाएगा। जिससे रोजाना लगभग 200 गाड़ियां धुआं मुक्त होकर सीएनजी से चल सकेंगी। क्लीन ग्वालियर-ग्रीन ग्वालियर की परिकल्पना को लेकर लगाए जा रहे इस सीएनजी प्लांट के लिए स्थल का सर्वेक्षण करने पहुंचे इंडियन आॅयल कंपनी के अधिकारियों द्वारा मौके पर विस्तृत जानकारी एकत्रकर पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

