भोपाल
भोज मुक्त विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया को 15 दिन आगे बढ़ा दिया गया है। इसमें करीब 75 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। पचास विद्यार्थियों ने रामचरित मानस से सामाजिक विकास डिप्लोमा में प्रवेश लिया है। डिप्लोमा में विद्यार्थी मानस की चौपाइयों को भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान और पर्यावरण विज्ञान से जोड़कर पढ़ेंगे। इससे वे समझ सकेंगे कि सनातन धर्म भी विज्ञान पर आधारित है।
भोज विवि ने रामचरित मानस से सामाजिक विकास डिप्लोमा कोर्स को उत्तर प्रदेश के अयोध्या शोध संस्थान की मदद से तैयार कराया है। इसके विद्यार्थी पत्थर पर लिखे श्रीराम नाम से समुद्र में तैरने या ध्वनि की गति से पुष्पक विमान के उड़ने के संबंध में पढ़ पाएंगे।
श्रीराम के वनवास के दौरान प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यावरणीय विज्ञान का अध्ययन करने को मौका भी विद्यार्थियों को मिलेगा। विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए विवि ने प्रवेश तिथि 15 दिन की बढ़ोतरी कर अंतिम तिथि 30 नवंबर कर दी है।
आइजैक न्यूटन ने दुनिया को गुरुत्वाकर्षण और गति के नियमों से अवगत कराया है। ये सिद्घांत प्रकृति से जुड़े हुये हैं। आज भी गणित, भौतिक और रसायन विज्ञान के कई सिद्धांति जटिल बने हुए हैं। उन्हें भी भोज विवि रामचरित मानस की चौपाइयों से आसान बनाएगा।
इनका कहना
ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, कर्मकांड के साथ विद्यार्थी अन्य कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। कोर्स से विद्यार्थी धर्म, वैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं से जुड़ेंगे। डिप्लोमा में रामचरित मानस की चौपाइयों से धर्म और विज्ञान के परस्पर संबंध का अध्ययन होगा।
डॉ. जयंत सोनवलकर, कुलपति, भोज विश्वविद्यालय

