मुंबई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज देश का बजट पेश किया, जिसमें उन्होंने हर क्षेत्र से जुड़ी घोषणाएं की। लेकिन कोरोना महामारी की मार झेल रहे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का सपना टूट गया। वित्त मंत्री के पिटारे से हमेशा की तरह इस बार भी मनोरंजन जगत को राहत देने के लिए कोई घोषणा नहीं हुई। यहां तक की बजट में इस इंडस्ट्री का नाम भी नहीं लिया गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गेमिंग और एनिमेशन इंडस्ट्री के इमरजेंस और रोजगार पर स्पष्ट रूप से बात की। लेकिन मनोरंजन जगत और भारतीय मीडिया पर कोई चर्चा नहीं की गई। कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन में पिछले दो सालों से इंड्रस्ट्री को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा और अभी भी यह जारी है। कई मेकर्स को करोड़ों का नुकसान हुआ है। हाल ही में सिनेमा घर खुले लेकिन कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए कई जगहों पर थिएटर को बंद कर दिया गया और कई जगह पर दर्शकों की संख्या को सीमित कर दिया गया। यहां तक की कई फिल्मों के शूटिंग भी रद्द हो गए। आर्थिक नुकसान झेल रहे मनोरंजन जगत को इस साल बजट से काफी उम्मीद थीं। लेकिन इनके हिस्से फायर की जगह फ्लावर आया।
बता दें कि 1998 में दिवंगत सुषमा स्वराज ने मनोरंजन जगत को इंडस्ट्री का दर्जा दिया था। लेकिन महज यह पेपर पर ही रहग गया। एक मीडिया चैनल से बात करते हुए फिल्म ऐंड टेलीविजन डायरेक्टर असोसिएशन के प्रेसिडेंट अशोक पंडित ने बताया कि सरकार को हम इंडस्ट्री स्टेटस के एक्जीक्यूशन को लेकर कई बार अप्रोच कर चुके हैं। लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। बजट में इसके बाबत भी कोई जिक्र नहीं किया गया।
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को बजट में कुछ नहीं मिलने पर कई फिल्म मेकर्स, प्रोड्यूसर और सिनेमा मालिकों में निराशा का माहौल है।

