जबलपुर। अनुवांशिक रोग ‘सिकल सेल एनीमिया’ से प्रदेश की जनजातीय बहुल आबादी पीड़ित होने के बाद इस रोग की रोकथाम को लेकर आयुष विभाग ने एक पायलट प्रोजेक्ट (जिसमें आयुष विभाग व आईसीएमआर समन्वय के साथ काम करेगा) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वीकृति के लिए भेजा है। दरअसल, यह पूरी कवायद प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल की पहल पर शुरू की गई है। प्रोजेक्ट को अभी केंद्र से स्वीकृति नहीं दी है। उम्मीद जताई जा रही है इसे जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी।
एमपी के 22 जिले प्रभावित
बताते हैं कि प्रदेश के अलीराजपुर, अनूपपुर, बालाघाट, बड़वानी, बैतूल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, धार, डिंडोरी, होशंगाबाद, जबलपुर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मंडला, रतलाम, सिवनी, शहडोल, शिवपुरी, सीधी, सिंगरौली व उमरिया सिकल सेल से प्रभावित हैं।
बनाई गई विशेषज्ञों की टीम
प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए शासन ने विशेषज्ञों की टीम में प्रदेश के आयुर्वेद कॉलेजों से दो विशेषज्ञ, दो वैज्ञानिक आईसीएमआर के शामिल किए हैं। जानकार बताते हैं कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में आईसीएमआर सप्ताह के दो दिन अपने एक विशेषज्ञ को ओपीडी में बैठाकर रेफर होकर आने वाले इस रोग के मरीजों को देखते हैं और उनकी प्रोफाइल तैयार करते हैं।
राज्यपाल ने की थी समीक्षा
राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने सिकल सेल एनीमिया रोग उपचार और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर राजभवन में चर्र्चा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री व अधिकारियों से कहा है कि सिकल सेल एनीमिया रोग के उपचार और प्रबंधन में सबका साथ और सबका प्रयास जरूरी है। रोग का सर्वेक्षण तेज गति से हो इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी सभी स्तरों पर प्रयास किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह जेनेटिक बीमारी है। सिकल सेल ट्रेट या वाहक माता-पिता के बच्चे में सिकल सेल रोगी होने की संभावना 25 % होती है।

