भोपाल
शहरी क्षेत्रों के बाद अब सरकार का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का है। इसके तहत दो हजार या उससे अधिक जनसंख्या वाले गांवों को चिंहित कर लिया गया है। नए साल में इन सभी गांवों में इस कार्य की शुरूआत हो जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
प्रयास यही है कि शहरों के साथ गांवों में भी स्वच्छता को लेकर प्रतिस्पर्धा हो। बेहतर कार्य करने वाले गांवों, पंचायतों को पुरस्कृत किए जाने की भी योजना है। जिससे अन्य गांव भी प्रोत्साहित हों। कचरा प्रबंधन और इसे खाद के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। निर्देश दिए गए हैं कि सभी जिलों को स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण की प्रगति की एंट्री की जाए। जिन जिलों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन की संभाग स्तरीय प्रशिक्षण हो चुका है, वे अपने-अपने गांवों की डीपीआर एवं कार्ययोजना तैयार कर कार्य प्रारंभ कराएं। यही नहीं गोवर्धन योजना के तहत सभी जिलों को गौशालाओं में बायोगैस संयंत्र स्थापना के लिए स्थान का चयन कर लें। डीपीआर तैयार करने को भी कहा गया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण मद से गांवों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए वाहन खरीदने, प्लास्टिक अपशिष्ट के लिए भण्डारण एवं कम्पोस्ट पिट्स निर्माण कार्य किए जाएं।

