Saturday, January 17

छतरपुर में 50 लाख रूपए से बनी मछली मण्डी अब तक शुरू नहीं हो पाई

छतरपुर में 50 लाख रूपए से बनी मछली मण्डी अब तक शुरू नहीं हो पाई


छतरपुर

आम जनता के टैक्स से इकट्ठा हुआ धन सरकार विकास कार्येां पर खर्च करती है लेकिन जनता का यही पैसा किस तरह बर्बाद किया जाता है इसके दो मामले जिला मुख्यालय पर नजर आ रहे हैं। वर्ष 2018 में 80 लाख रूपए की लागत से संकट मोचन मार्ग पर ग्राम पलौठा के समीप निर्मित हुआ स्टेडियम खिलाडिय़ों की जगह पशुओं का आशियाना बन गया है जबकि इसी सड़क पर मौजूद 50 लाख रूपए से बनी मछली मण्डी अब तक शुरू नहीं हो पाई है। ये दोनों इमारतें लाखों रूपए के खर्च से निर्मित हुईं और सद्पयोग के पहले ही जीर्णशीर्ण होने लगी हैं।

लगभग 4 साल पहले 2018 के पूर्व छतरपुर में खिलाडिय़ों के हितों के लिए एक दूसरे स्टेडियम निर्माण की पहल शुरू हुई थी। सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 80 लाख रूपए की लागत से एक स्टेडियम बनाकर 2018 में खिलाडिय़ों को आकर्षित करने की कोशिश की थी। छतरपुर में ग्राम पंचायत बरकौहां के अंतर्गत यह स्टेडियम निर्मित कराया गया लेकिन स्टेडियम का औचित्य आज तक पूरा नहीं हुआ। यहां रहने वाले लोग बताते हैं कि स्टेडियम को जनपद पंचायत के द्वारा बनाया गया था। इसकी देखभाल ग्राम पंचायत बरकौहां को करनी थी और खेल एवं युवक कल्याण विभाग के द्वारा खेल प्रतिस्पर्धाएं आयोजित करानी थी। इन तीनों विभागों ने कभी भी इस स्टेडियम को अपनी जिम्मेदारी नहीं माना। यही वजह है कि यह स्टेडियम ताले में कैद रहता है। यहां कभी कोई खेल आयोजन नहीं होते। इतना ही नहीं स्टेडियम तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है इसलिए खिलाड़ी भी यहां नहीं जाते। कई बार स्टेडियम में जानवरों का बसेरा देखा गया है।

दुकान का आवंटन तक नहीं हुआ
50 लाख रूपए की लागत से छतरपुर नगर पालिका ने सिंघाड़ी नदी के समीप थोक मछली मण्डी का निर्माण लगभग 3 वर्ष पूर्व कराया था। नगर पालिका की मंशा थी कि खुले में होने वाली मछली की बिक्री को एक बंद मण्डी के भीतर कराया जाए ताकि लोगों को समस्या न हो। लेकिन नपा का यह सपना 3 साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर पाया जबकि इस मण्डी के निर्माण में लाखों रूपए खर्च कर दिए गए। यहां मण्डी के भीतर दुकानें बनाई गईं लेकिन दुकानों का आवंटन आज तक नहीं हो सका। दुकानदार खदेड़कर शिफ्ट करने की कोशिश की गई लेकिन वे बुनियादी सुविधाएं न होने का बहाना बनाकर यहां जाना नहीं चाहते। कुल मिलाकर 50 लाख रूपए की बर्बाद का यह मामला नगर पालिका भूल जाना चाहती है। इस मामले पर सीएमओ ओमपाल सिंह भदौरिया का कहना है कि जल्द ही यहां बुनियादी सुविधाएं बिजली, पानी की पूर्ति कर दुकानें आवंटित की जाएंगी।

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