जबलपुर
भीषण गर्मी में तप रहे जंगलों में अचानक घटे जल स्त्रोत के कारण नक्सली मूवमेंट क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहे जवान शुद्ध पेय जल के लिए तरस रहे हैं। केंप में साफ पानी पहुंचाने के लिए जवानों ने अपने स्तर पर अधिकारियों से बात करते हुए कहा है कि नक्सली क्षेत्र में पहले पीने का पानी सरलता से मिल जाता था,अब नहीं मिलता! घटते जल स्तर और जंगल के अंदर प्राकृतिक छोटे-छोटे झरने, तालाब एवं छोटे कुआं सूखे पत्तों के गिरने से करीब-करीब बंद हो गए हैं। जमीन के निचले हिस्से में कुछ स्थान पर पानी है,लेकिन कचरे के कारण पानी पीने योग्य नहीं है। नक्सली मूवमेंट वाले सिंगरोली-मंडला से ज्यादा पानी की किल्लत मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र की बार्डर बालाघाट में बनी हुई है।
बालाघाट में पदस्थ पुलिस अधिकारी ने बताया ‘हम पेय जल साफ करने के लिए अनेक कदम उठाते हैं, लेकिन ये काफी नहीं होता। जवान जब गश्त पर जाते हैं तो उन्हें खुले स्त्रोतों में उपलब्ध पानी पीना पड़ता है जिससे वे बीमार पड़ते हैं। आज हालत यह हैं कि खुले स्त्रोतों में भी पानी नहीं है। पानी के लिए 3 राज्यों की सीमा के इलाकों में पुलिस अधिकारी कुछ शिविरों का जायजा ले चुके हैं। अधिकारियों ने पाया कि वहां गश्त करने वाले जवानों को पीने का पानी बहुत खराब मिल रहा है, जिससे उनके बीमार होने की संभावना बनी रहती है। पानी की कमी के चलते जंगलों के अंदर तक होने वाली गश्त भी प्रभावित हो रही है।'
पारा 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक
अधिकारियों ने बताया कि गर्मी के दौरान बालाघाट के जंगली इलाकों में पारा 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है और इस तरह के गर्म और उमस भरे मौसम में सुरक्षाकर्मी जल्द ही निढाल हो जाते हैं, इससे उनमें हताशा होती है। गश्त क्षेत्र से ग्रामीणों की बसाहट भी दूर रहती है, इसलिए पानी की उपलब्धता नहीं होती। सुरक्षा बल अपनी परेशानी आला अफसरों तक पहुंचा चुके हैं।

