भोपाल
आबकारी विभाग ने भोपाल जिले में नए वित्तीय वर्ष (2022-23) के लिए 33 ग्रुपों की करीब 90 शराब दुकानों के दाम करीब 20 फीसदी बढ़ा दिए हैं। दुकानों के दाम बढ़ने के कारण शहर के 22 ग्रुपों की करीब 58 शराब दुकानों को बेचने के लिए आबकारी विभाग ने दो बार प्रयास किए, लेकिन करीब एक महीना बीतने को है फिर भी इन दुकानों को लेने के लिए कोई आगे नहीं आया है।
ऐसे में आबकारी विभाग करीब 777 करोड़ रुपए कमाने के लिए बची हुई शराब दुकानों की तीसरी बाद नीलामी गुरुवार दोपहर को करेगा। नए वित्तीय वर्ष के लिए राजधानी की सभी 33 ग्रुपों की शराब दुकानों के लिए विभाग ने 1057 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस रखी है। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में 780 करोड़ रुपए में सिंगल ग्रुप को ये ठेके दिए गए हैं। गौरतलब है कि बीते साल की तुलना में चालू वर्ष में 15 फीसदी शराब दुकानों के रेट बढ़ाकर सिंगल ग्रुप को ठेका दिया गया था।
एक महीने पहले बिक गई थी 32 दुकानें
जिले में आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 33 ग्रुपों में से 11 ग्रुपों की करीब 32 शराब दुकानें ही सेल हो सकी हैं। इनसे 300 करोड़ रुपए से अधिक कमाए जा चुके हैं। बची हुई शराब दुकानों को बेचने के लिए आबकारी विभाग को तीसरी बार कवायद कर रहा है। बड़ी दुकानों के रेट अधिक होने के कारण शराब ठेकेदारों ने इनसे दूरी बना ली थी, जिसके लिए फिर से नीलामी हो रही है।
एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और कोलार के लिए ज्यादा जोर
शहर के बड़े ग्रुप एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी, कोलार की दुकानों को बेचने के लिए विभाग ज्यादा मशक्कत कर रहा है। ये तीनों दुकानें 54 करोड़, 53 करोड़ और 52 करोड़ रुपए की हैं। करीब एक महीने पहले शहर की 90 शराब दुकानों में से मात्र 32 को ही खरीदने के लिए शराब कारोबारी आगे आए थे। उनमें सिर्फ छोटे ग्रुप की दुकानों को लेने की होड़ दिखी थी। सूत्रों की मानें तो शराब सिंडीकेट पर दबाव बनाने के लिए विभाग ने शराब दुकानों की जांच की थी, तब ठेकेदार ने विरोध करते हुए अपनी दुकानें बंद कर दी थी। दिन भर चले टकराव के बाद ठेकेदारों ने बाद में अपनी दुकानें खोल दी थी।
नहीं बिकी दुकानें तो बनेगी योजना
विभागीय सूत्रों की मानें तो यदि तीसरी बार के प्रयास में भी यदि शहर की 58 शराब दुकानें नहीं बिकी तो आबकारी विभाग इनके लिए अलग नीति बनाएगा। इसमें विभाग द्वारा खुद भी दुकानें संचालित करने की भी तैयारी चल रही है। इसके अलावा आबकारी विभाग पड़ोसी प्रदेश की आबकारी नीति के तहत भी निर्णय ले सकता है। हालांकि अफसरों का ध्यान अभी तीसरी नीलामी पर जोर दिया जा रहा है।

