भोपाल
महंगाई के चलते किचन का बजट बिगाड़ चुके खाद्य तेल और तिलहन के दामों में और तेजी की आशंका ने राज्य सरकार की चिंता बढा दी है। इन हालातों में व्यापारियों की कालाबाजारी और स्टाक बढ़ाकर तेल आपूर्ति बाधित करने की आशंका के मद्देनजर राज्य सरकार ने खाद्य तेल और तिलहन व्यापारियों के लिए स्टाक सीमा तय कर दी है। इस स्टाक लिमिट का उल्लंघन करने पर व्यापारियों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी। इसमें ऐसे लोगों को छूट रहेगी जो वैयक्तिक खेती द्वारा उत्पादित खाद्य तेल और तिलहन का स्टाक करते हैं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा इसको लेकर जारी आदेश में कहा गया है कि आयात और निर्यात करने वाले व्यापारियों को कुछ राहत मिल सकती है लेकिन बाकी सभी थोक और फुटकर व्यापारियों के लिए स्टाक लिमिट का पालन करना जरूरी होगा। व्यापारी के लिए कहा गया है कि दाम बढ़ाने के लिए सट्टे वाली रीति से खाद्य तेल और तिलहन का कारोबार नहीं किया जा सकेगा।
शासन ने निर्देश में कहा है कि इस आदेश का उल्लंघन करने के मामले में जांच और कार्यवाही के लिए एसीएस, पीएस, सचिव, आयुक्त, संचालक खाद्य व नागरिक आपूर्ति, अपर संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक और कलेक्टर, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, जिला आपूर्ति नियंत्रक, कार्यवाही के लिए अधिकृत होंगे। इनके साथ ही संचालनालय और जिलों में पदस्थ सहायक आपूर्ति अधिकारी, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी भी कार्यवाही कर सकेंगे।
व्यापारियों के लिए यह रखी गई स्टाक लिमिट
खाद्य तेल फुटकर व्यापारी 30 क्विंटल स्टाक कर सकेंगे जबकि थोक व्यापारी के लिए यह लिमिट 500 क्विंटल तय की गई है। फुटकर दुकानों की बड़ी चेन के मामले में डिपो के लिए 1000 क्विंटल तक की लिमिट होगी। इसके साथ ही खाद्य तेल प्रसंस्करण करने वाली यूनिट के लिए भंडारण क्षमता 90 दिन की तय की गई है। खाद्य तिलहन को लेकर जो स्टाक सीमा तय हुई है, उसके अनुसार फुटकर व्यापारी 100 क्विंटल, थोक व्यापारी 2000 क्विंटल स्टाक कर सकेंगे।
बताना होगा स्टॉक
व्यापारियों को अपनी फर्म के बाहर स्टाक की सूची लगाना होगी जिससे यह पता चल सके कि प्रारंभिक स्टाक, आवक, बेची गई मात्रा और शेष स्टाक की स्थिति क्या है? इसके आधार पर औचक जांच में व्यापारी ओवर स्टाक न पाए जाने पर कार्यवाही से बच सकेंगे।

