जयपुर
राजस्थान में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2021 के आंकड़े इसे लेकर डराने वाले हैं। आलम यह है कि साल 2020 और 2021 में कोरोना पाबंदियों के बाद भी देखने को मिल मिलता है कि राजस्थान में अपराध चार गुना तेजी बढ़ा है। साल 2021 में प्रदेश में अपराध 2020 की तुलना में 6 से 26 प्रतिशत तक अधिक रहा है।
बजट सत्र में भी रही महिला अपराध की चर्चा
बड़ी बात यह है कि राजस्थान में महिला अपराध के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। गौरतलब यह भी है कि प्रदेश विधानसभा में चल रहे मौजूदा बजट सत्र में भी सबसे अधिक सवाल महिला अपराध को लेकर ही केंद्रित रहे। शायद इसकी बड़ी वजह यही है कि कोरोना काल में महिला अपराध में राजस्थान में बड़ी वृद्धि देखने को मिली है।
यह है राजस्थान के अपराध का ग्राफ, पढ़ लीजिए आंकड़े
आपको बता दें अलवर, धरियावद, जयपुर आदि में पिछले दिनों बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं से पूरे प्रदेश में आक्रोश है। इस बीच, गृह विभाग की रिपोर्ट और भी डराने वाली है। दिसंबर 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में रोज 11 लोगों की हत्या या हत्या का प्रयास हो रहे हैं। यही नहीं रोज 21 महिला, बच्चों का अपहरण, जबरन बंधक बनाने, रिश्ते बनाने के लिए बाध्य करने जैसी वारदात हो रही हैं। रोज 18 बेटियां दरिंदगी का शिकार बनती हैं, जबकि रोज 100 लोगों के घरों में ताले टूटने या चोरी के लिए परिवार को बंधक बनाने जैसी वारदात सामने आती है। रोज 19 लोगों की जेब काट दी जाती है।
महिला अपराध में हुआ सबसे ज्यादा इजाफा
महिला अपराध से जुड़े मामलों पर गौर किया जाएं, तो कुल केस 40,220 हुए, जो पिछले साल के 34,368 की तुलना में 17.03% ज्यादा है।पॉक्सो एक्ट के केस एक साल में 3,246 दर्ज किए गए। इनमें से 21% को झूठा बताया गया। इधर एससी-एसटी वर्ग उत्पीड़न के 2020 में 8,895 केस थे, 2021 में 9645 हुए, यानी 8.43% की बढ़ोतरी।
पेंडिंग्स घटी, गिरफ्तारियां भी बढ़ी
हालांकि राहतभरी बात यह है कि पहले पुलिस थानों में केस दर्ज नहीं होने पर कोर्ट के माध्यम से 33.4% एफआईआर दर्ज करवाई जाती थीं। अब आंकड़ा 16 परसेंट ही रह गया है। वहीं 2.14 लाख में से 1.94 लाख एफआईआर का निस्तारण किया जा चुका। 19 प्रतिशत केस पैंडिंग है। महिला अपराधों में 99% में चालान पेश हुए है। बड़ी बात यह भी है कि एक साल में 1,86,451 अपराधियों को गिरफ्तार किया।

