Sunday, January 25

सरकार ने बदले टोल टैक्स के नियम, अब 70% तक की छूट, जानें कहां मिलेगा फायदा

सरकार ने बदले टोल टैक्स के नियम, अब 70% तक की छूट, जानें कहां मिलेगा फायदा


नई दिल्ली

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने टोल टैक्स के नियम बदले हैं। इसके तहत अब 70 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। एनएचआई के नए नियम के मुताबिक, दो लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान टोल टैक्स में 70 फीसदी की छूट देने का निर्णय लिया है। सड़क यात्री टोल टैक्स का सिर्फ 30 प्रतिशत भुगतान करेंगे।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। इस नए नियम के तहत दो-लेन (पेव्ड शोल्डर सहित) वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा करने के दौरान वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों से पूरा टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसमें 70 फीसदी की बड़ी कटौती की गई है।

संशोधित नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख से लेकर परियोजना पूरा होने तक सड़क यात्रियों को तय टोल का केवल 30 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा। यानी निर्माण के दौरान यात्रियों को टोल दरों में 70 प्रतिशत की सीधी छूट मिलेगी। मालूम हो कि एनएचएआई हर साल टोल दरों में सात से 10 फीसदी की वृद्धि करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह संशोधन नए साल से लागू कर दिया गया है। सरकार ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। नया नियम उन सभी वर्तमान और नई राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगा, जहां दो-लेन राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक में अपग्रेड किया जा रहा है।
चार लेन के हाईवे पर 25 फीसदी की छूट

नए नियम के अनुसार, राजमार्ग के चार-लेन से छह या आठ-लेन बनने पर टोल टैक्स में 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। यानी टोल टैक्स की तय दर का 75 फीसदी भुगतान करना होगा। इसके अलावा, टोल रोड की लागत पूरी होने पर टैक्स सिर्फ 40 प्रतिशत लेने का नियम पहले से है।
25-30 हजार किमी पर चल रहा काम

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 25 से 30 हजार किलोमीटर के दो-लेन राजमार्गों को चार-लेन में अपग्रेड किया जाना है। इसके लिए करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई का हिस्सा 40 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य है। चार-लेन कॉरिडोर बनने से व्यावसायिक वाहनों की औसत रफ्तार 30-35 से बढ़कर 50 किमी प्रतिघंटा से अधिक हो जाएगी।

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