हल्द्वानी
हर साल करोड़ों रुपये कमाकर देने वाले वन विकास निगम में कर्मचारियों की भारी कमी है। नदियों में खनन कार्य शुरू होने को है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते परेशानी पैदा हो रही है। पूरे राज्य में पहले 3300 कर्मचारी थे, जो वर्तमान में मात्र 400 रह गए हैं। यही हालात रहे तो निगम के रुटीन काम भी होने बंद हो जाएंगे। वन विकास निगम राज्य की विभिन्न नदियों में खनन कार्य को अंजाम देता है। इनसे प्रतिवर्ष राज्य को करोड़ों रुपये की आय होती है। इसके अलावा निगम वन विभाग के छपान के बाद जंगलों से पेड़ों को काटने उनको एकत्र करने के साथ उसकी बिक्री का काम भी करता है। वृक्षों के कटान व छपान से भी हर साल राज्य सरकार को करोड़ों की आय होती है। हर साल राज्य को करोड़ों रुपये कमाकर देने वाले वन विकास निगम की हालत पतली है। स्थिति यह है कि रुटीन के काम करने के लिए निगम के पास कर्मचारी नहीं हैं। इसके चलते कामों में लेटलतीफी तो हो ही रही है, वहीं रेता बजरी, लकड़ी की चोरी होने की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। जल्द ही कोसी दाबका, नंधौर, गौला आदि नदियों में खनन कार्य शुरू होना है, ऐसे में निगम को दोहरी परेशानी झेलनी होगी। वन विकास निगम के कर्मचारियों के संगठन के नेताओं का कहना है कि यही हाल रहा तो 2025 में निगम में मात्र 2 प्रतिशत ही कर्मचारी रह जाएंगे।
एक साल से लटका लेखाकार का मामला
कर्मचारी नेताओं के कर्मचारियों की कमी का मामला उठाने के बाद बीते साल वन विकास निगम में 59 लेखाकारों की भर्ती निकाली गई। लेखाकार की परीक्षा भी हो चुकी है। करीब एक साल होने को है, लेकिन अभी तक रिजल्ट नहीं निकला है।

