Thursday, July 25

योगी राज में गैंग की टूटी कमर : एक के बाद एक मारे गए मुख्‍तार के कई सिपहसलार, अरबों की सम्‍पत्ति हो गई जब्‍त

योगी राज में गैंग की टूटी कमर : एक के बाद एक मारे गए मुख्‍तार के कई सिपहसलार, अरबों की सम्‍पत्ति हो गई जब्‍त


 लखनऊ 
एक लाख के इनामी शूटर अलीशेर और कामरान को मुठभेड़ में ढेर कर मुख्‍तार अंसारी गैंग को यूपी पुलिस ने एक और बड़ी चोट दी है। पिछले साढ़े चार सालों में एक के बाद एक मुख्‍तार के कई सिपहसलार खेत रहे। मुख्‍तार, उनकी पत्‍नी, बेटों, रिश्‍तेदारों सहित तमाम करीबियों की अरबों रुपयों की सम्‍पत्ति जब्‍त हो चुकी है। पूर्वांचल के माफिया गिरोहों पर लम्‍बे समय से नज़र रखने वाले जानकारों का मानना है कि इन कार्रवाईयों की वजह सो मुख्तार गैंग की कमर लगभग टूट चुकी है। अभी बांदा जेल में बंद मऊ के विधायक मुख्‍तार अंसारी के गैंग की कभी उत्‍तर प्रदेश में पूरब से लेकर पश्चिम तक तूती बोलती थी। लोग इस गैंग के नाम से खौफ खाते थे। मुख्‍तार के हौसले कितने बुलंद थे कि इसका अंदाजा उन्‍हें जानने वाले लोगों की बातों से लगाया जा सकता है। बताते हैं कि जब मुख्तार अंसारी का काफिला सड़क से गुजरता था तो किसी की मजाल नहीं थी कि सामने आ जाए। एक लाइन से 786 नंबर की 20 से 30 एसयूवी गुजरती थीं। मऊ दंगों के दौरान खुली गाड़ी में हथियारों से लैस होकर निकले मुख्‍तार और उनके समर्थकों की तस्‍वीरें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
 
यह वर्ष 2005 की घटना है। मऊ में दंगे हुए थे। उस समय मुख्तार अंसारी खुली गाड़ी में दंगे वाले इलाकों में घूम रहे थे। उन पर दंगे भड़काने का आरोप लगा था। यह वो वक्‍त था जब मौजूदा मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ गोरखपुर से सांसद हुआ करते थे। उस समय योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार अंसारी को चुनौती दी थी। उन्‍होंने कहा था कि मऊ दंगे के पीड़ितों को इंसाफ दिला के रहेंगे। वह गोरखपुर से मऊ के लिए निकल भी पड़े थे। लेकिन उन्‍हें दोहरीघाट में ही रोक दिया गया था। तब योगी आदित्‍यनाथ की गाड़ी पर हमला भी हुआ था जिसका आरोप उन्‍होंने मुख्‍तार अंसारी पर लगाया था। खैर वो बात पुरानी हो चुकी। इतने वर्षों में मुख्‍तार अंसारी का खौफ काफी मद्ध‍िम पड़ चुका है। यूपी में योगी आदित्‍यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनने के बाद तो लगातार मुख्‍तार अंसारी गैंग कमजोर होता गया है। आंकड़ों की मानें तो योगी आदित्यनाथ के शासनकाल के दौरान 20 मार्च 2017 से नौ मार्च 2021 के बीच  7791 पुलिस मुठभेड़ हुईं। इनमें पुलिस की गोली लगने से 135 अपराधी मारे गए और 3039 घायल हुए। मुठभेड़ में 16,661 अपराधी गिरफ्तार हुए। मुख्‍तार अंसारी गैंग के कई सदस्‍य भी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। कुछ जेल के अंदर हुई गैंगवार में खेत रहे। 

मुख्‍तार के लिए काम करता था अलीशेर 
बुधवार को लखनऊ के फैजुल्‍लागंज में बंधा रोड पर हुई मुठभेड़ में मारा गए एक लाख के इनामी शूटर अलीशेर उर्फ डॉक्टर और कामरान उर्फ बन्नू भी मुख्‍तार के लिए काम करते थे। अलीशेर ने 22 सितम्बर को झारखण्ड में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष जीतराम मुण्डा की हत्या कर दी थी। उस पर एक लाख रुपये इनाम घोषित हुआ था। वह आजमगढ़ में बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या में भी शामिल था। एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि जीतराम मुण्डा की हत्या के बाद से अलीशेर फरार चल रहा था। वह मूल रूप से आजमगढ़ के देवगांव का रहने वाला है जबकि कामरान आजमगढ़ के गम्भीरपुर का है। एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि अलीशेर की लोकेशन मड़ियांव थाना क्षेत्र के फैजुल्लागंज के पास मिली थी। इस पर एसटीएफ वहां पहुंची। एसटीएफ ने उसकी घेराबंदी की तो दोनों बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में अलीशेर व कामरान को गोली लग गई। दोनों को गम्भीर हालत में भाऊराव देवरस अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। दोनों के पास कार्बाइन, दो पिस्टल, तमंचा और भारी मात्रा में कारतूस मिले हैं।

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