Wednesday, April 17

जे नंदकुमार बोले – संघ को दिखने लगी है पाकिस्तान व बांग्लादेश के भारत में विलय की किरणें

जे नंदकुमार बोले – संघ को दिखने लगी है पाकिस्तान व बांग्लादेश के भारत में विलय की किरणें


वाराणसी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंद कुमार ने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी भारत के साथ मिलने का विचार आ रहा है। विलय का सूर्योदय भले नहीं हुआ है, लेकिन उदय से पहले वाली किरणें दिखने लगी हैं।  वह दिन दूर नहीं जब भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश व श्रीलंका का एकीकरण पूरे विश्व के सामने आएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए भारत को पूरे विश्व में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित होना होगा, जो न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और वैचारिक नजरिए से भी संप्रभुत्ववादी होना पड़ेगा। उन्होंने ये बातें संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर कहा, जिसमें भागवत ने कहा कि भारत और पाकिस्तान का बंटवारा सही नहीं हुआ है, इसलिए इन्हें फिर से एक बार मिल जाना चाहिए। जे. नंद कुमार शनिवार को वाराणसी में थे। वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अमृत महोत्सव के तहत 'स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर' विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करने पहुंचे हैं। इससे पूर्व कैंटोंमेंट स्थित एक होटल में मीडिया से बातचीत में केरल सहित दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में मुस्लिम आबादी की बढ़ोतरी और हिंदुत्व पर खतरे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हमें हिंदुत्व के लिए जन जागरण की आवश्यकता है। जिसके लिए संघ लगातार धरातल पर काम कर रहा है। जे. नंदकुमार ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर और काशी में विश्वनाथ धाम की स्थापना से ना केवल पूरे भारत में बल्कि विश्व में एक अलग विचार धारा प्रवाहित हुई है जो एक सकारात्मक संदेश भी दे रही है। सबसे ज्यादा इसका प्रभाव पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों पर है और वह अब दिखने भी लगा है कि वहां के लोग इन दोनों स्थलों की ओर काफी तेजी से रुख किए हैं।

गांधी जी को लेकर धारण बदलनी होगी
एक सवाल के जवाब में जे नंद कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी हम सभी के दिल में हैं। जो लोग भी उन्हें लेकर बयानबाजी करते हैं, उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हर व्यक्ति के अंदर अच्छाई और बुराई होती है। उसके निर्णय समय के आधार पर ही निर्धारित होते हैं। संघ और गांधी जी को लेकर जो धारणाएं बनाई गई हैं, उन्हें बदलना चाहिए।

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