Friday, February 23

‘भारतीय कब्जे वाला कश्मीर’ लिखने पर JNU फिर विवादों में, भारी विरोध के बाद वेबिनार रद्द

‘भारतीय कब्जे वाला कश्मीर’ लिखने पर JNU फिर विवादों में, भारी विरोध के बाद वेबिनार रद्द


नई दिल्ली
कश्मीर को लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर विवादों में आ गया है। कश्मीर को लेकर सेंटर फार वुमन स्टडीज द्वारा आयोजित वेबिनार के लिए जारी आमंत्रण पत्र पर ही शिक्षकों व छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। एबीवीपी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई। इसके बाद शुक्रवार शाम से आयोजित वेबिनार को ही रद कर दिया गया। वेबिनार के रद होने के बाद भी आयोजकों पर कार्रवाई की मांग शुरू हो गई है।  छात्रों शिक्षकों की मुख्य आपत्ति कश्मीर को लेकर किये गए संबोधन पर है। एक शिक्षक ने बताया कि जेएनयू प्रशासन ने भी इस पर घोर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद शुक्रवार रात 8.30 बजे होने वाला वेबिनार रद कर दिया गया। एबीवीपी ने इसे एक गैर संवैधानिक वेबिनार करार दिया। एबीवीपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि वेबिनार वेबपेज ने जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश को 'भारतीय अधिकृत कश्मीर' के रूप में संबोधित किया है जिस पर हमें घोर आपत्ति है। 

जेएनयू की एबीवीपी इकाई का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कम्युनिस्टों द्वारा आयोजित राष्ट्र-विरोधी कार्यक्रम की याद दिलाते हुए, भारत की संप्रभुता को कमजोर करने वाला एक और कार्यक्रम भारत के सामाजिक विज्ञान स्कूल में महिला अध्ययन केंद्र में सामने आया है। हमारे संज्ञान में आया है कि महिला अध्ययन केंद्र ने 29 अक्टूबर, 2021, शुक्रवार को रात 8:30 बजे 2019 के बाद कश्मीर में लैंगिक प्रतिरोध और नई चुनौतियां नामक एक वेबिनार आयोजित करने का एक जानबूझकर प्रयास किया है।  यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वेबिनार वेबपेज ने जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश को 'भारतीय कब्जे वाले कश्मीर' के रूप में संबोधित किया है। यह इस तथ्य के बावजूद है कि भारत सरकार ने बार-बार कश्मीर को भारत गणराज्य का अभिन्न अंग बताया है। इस तरह के वेबिनार और आयोजनों ने जेएनयू को राष्ट्र-विरोधी प्रवचन के लिए एक स्थान के रूप में चित्रित करना जारी रखा है और इसलिए यह हर तरह से निंदनीय है।

जेएनयू में एबीवीपी इकाई के अध्यक्ष शिवम चौरसिया ने कहा कि हमने प्रशासन से इस वेबिनार को तुरंत बंद करने की मांग की है क्योंकि यह भारत गणराज्य और भारत के संविधान की अखंडता और संप्रभुता को कमजोर करता है। एबीवीपी-जेएनयू सचिव रोहित कुमार ने कहा कि हम महिला अध्ययन केंद्र की अध्यक्ष, संबंधित संकायों और जेएनयू रजिस्ट्रार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं, जिन्होंने कार्यक्रम की अनुमति दी थी और जिन्होंने इस तरह के वेबिनार का आयोजन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर किया है।
 

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