Tuesday, February 27

यूजी-पीजी में छह लाख 44 हजार दाखिले और पांच कालेज नहीं खोल सके खाते

यूजी-पीजी में छह लाख 44 हजार दाखिले और पांच कालेज नहीं खोल सके खाते


भोपाल
प्रदेश के 1301 कॉलेजों की प्रवेश प्रकिया पर आज विराम लग जाएगा। यूजी व पीजी में प्रवेश लेने विद्यार्थी आज फीस जमा कर सकेंगे। अभी तक यूजी और पीजी में छह लाख 44 हजार प्रवेश हो चुके हैं। इसमें यूजी चार लाख 87 हजार और पीजी में एक लाख 57 हजार प्रवेश हुये हैं। इसके बाद भी कल्याणपुर, संस्कृत कालेज उज्जैन, बमोरी, दिमानी और रेथौराकलां कालेज में एक भी प्रवेश नहीं हुये हैं। यहां जीरो प्रवेश हैं। जबकि यूजी-पीजी में अभी तक सबसे ज्यादा प्रवेश हुये हैं। इसके पहले विभाग ने गत वर्ष पांच लाख 61 हजार प्रवेश किये थे।

प्रदेश में करीब 72 कालेजों में प्रवेश की संख्या में 200 तक नहीं रहती हैं। जबकि 150 कालेज तो विद्यार्थियों की संख्या 150 तक पार नहीं कर पाता है, जिसके बाद भी उच्च शिक्षामंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्तमान सत्र में प्रवेश कराने एक दर्जन कालेज खोल दिये हैं। उनमें भी प्रवेश की स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है। मप्र के पंद्रह फीसदी कॉलेजों में में विद्यार्थी और प्रोफेसर की संख्या के बराबर प्रवेश हुये है। 72 कालेजों की स्थिति को देखते ने के बाद भी मंत्री यादव ने एक दर्जन कालेज खोलकर सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ डाल दिया है। यहां तक साढे चार सौ नये शैक्षणिक और अशैक्षणिक पद तक सृजित करा दिये हैं। वर्तमान सत्र में प्रदेश के 72 कॉलेजों में 200-200 तक प्रवेश संख्या नहीं पहुंची है। यह स्थिति वर्तमान की नहीं हैं। बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। कांग्रेस सरकार ने सरकारी खजाने का आर्थिक बोझ कम करने उक्त कालेजों को बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। उक्त कालेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नजदीकी बड़े कॉलेजों में शिफ्ट किया जाता। कांग्रेस सरकार कोई कार्रवाई कर उक्त 72 कालेजों पर ताले लग पाती। उसके पहले प्रदेश से कांग्रेस सरकार विदा हो गई और भाजपा सरकार फिर वजूद में आ गई और उक्त कालेज वर्तमान में संचालित हो रहे हैं।

आधा दर्जन कॉलेजों में कुल दो दर्जन विद्यार्थी भी नहीं
करीब आधा दर्जन कॉलेज ऐसे हैं, जिनमें दो दर्जन कुल विद्यार्थी तक नहीं हैं। जबकि प्रोफेसर और कर्मचारियों को लाखों रुपए का वेतन प्रतिमाह आवंटित किया जा रहा है। उक्त कॉलेजों में स्वयं का भवन के अलावा बिजली, पानी और संसाधनों का काफी अभाव है।

दस साल में बढ़े 200 कॉलेज
2008 में मप्र में 302 सरकारी कॉलेज थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा और स्थानीय नेता व मंत्री की मांगों पर पिछले दस सालों में बिना प्लानिंग के एक के एककर  200 नये कॉलेज खोले गये। वर्तमान में उनकी संख्या 516 तक पहुंच गई है।

उक्त जिलों के कॉलेजों में 200 से कम प्रवेश
सतना में छह कालेज, उज्जैन में पांच, रीवा और डिंडौरी में चार-चार, शाजापुर, सिंगरौली, शिवपुरी, श्योपुर, सीहोर और सीधी में तीन-तीन, अनूपपुर, शहडोल, हरदा, मंडला, रतलाम, रायसेन, धार, बड़वानी, सागर, सिवनी और बुरहानपुर में दो-दो, अशोकनगर, छिंदवाड़ा, आगरमालवा, ग्वालियर, होशंगाबाद, कटनी, मंदसौर, मुरैना, नीमच और पन्ना में एक-एक कॉलेज। इसमें एक दर्जन विधि कालेज भी शामिल हैं, जिनमें प्रवेश 15 से 120 तक हुये हैं।

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