Wednesday, December 7

गेहूं के बंपर उत्पादन से नई मुसीबत, कृषि मंत्री ने केन्द्र सरकार से की बारदानों की मांग, 24 हजार जूट गठानों की मांग


गेहूं के बंपर उत्पादन से नई मुसीबत, कृषि मंत्री ने केन्द्र सरकार से की बारदानों की मांग

भोपाल (दीपेश जैन) मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है। हालात ये हैं कि किसान समर्थन मूल्य पर खरीदी की तारीख आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अभी भी कृषि मंडियों के बाहर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्राली के साथ किसान कई-कई दिनों तक अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। इसी के साथ राज्य सरकार के सामने बारदाना संकट आ खड़ा हुआ है।

खुले में पड़ा हजारों मीट्रिक टन अनाज

दरअसल कई मंडियों में अभी गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। ऐसे में मानसून की दस्तक के साथ ही खुले में पड़े गेहूं को भरने की चिंता सताने लगी है। लिहाजा राज्य सरकार की ओर से किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने बारदानों की आपूर्ति के लिये केन्द्रीय उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान को पत्र लिखा है। कृषि मंत्री पटेल ने रबी विपणन वर्ष 2020-21 में गेहूँ, चना, मसूर, सरसों के उपार्जन के लक्ष्य के मद्देनजर रखते हुए पर्याप्त संख्या में बारदाने मुहैया कराये जाने का अनुरोध किया है।

 

 

 

 

केन्द्रीय मंत्री से बारदानों की डिमांड

अपने पत्र में मंत्री पटेल ने जानकारी दी कि अब तक करीब 15 लाख किसानों से 116 लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। जबकि प्रदेश में लगभग 125 लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा गेहूं खरीदी होने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश को तत्काल 14 हजार गठान जूट बारदाने की जरुरत है जिससे समय पर ही किसानों से उनकी पूरी उपज खरीदी जा सके।

फिलहाल एमपी सिविल सप्लाई कार्पोरेशन को जूट कमिश्नर के द्वारा 14 हजार जूट के गठानों की पूर्ति होना बाकी है।इसके साथ ही मंत्री पटेल ने लिखा कि चने की उपार्जन मात्रा बढ़ाने के बाद करीब 10 हजार गठान जूट की भी अतिरिक्त आवश्यकता है। ऐसे में करीब 24 हजार जूट गठानों की फौरन मांग करते हुए ये पत्र केन्द्रीय मंत्री पासवान को लिखा गया है। इसके साथ ही उन्होंने फोन पर भी केन्द्रीय मंत्री से चर्चा में ये अनुरोध किया ताकि समय पर बारदानों की आपूर्ति हो सके।

 

 

फौरन मदद की दरकार

अब देखना है कि केन्द्र में भी भाजपानीत सरकार होने का कितना फायदा प्रदेश सरकार को मिल पाता है। साथ कब तक और कितनी संख्या में बारदानों की पूर्ति हो पाती है। अगर इसमें ज्यादा समय लगा तो खुले में पड़े हजारों मीट्रिक टन अनाज पर मानसून पानी फेर सकता है।

 

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