Friday, April 12

पंजाब में बदले सियासी समीकरण, सत्ता पक्ष के साथ सुर में सुर मिला सकते हैं विपक्षी दल 

पंजाब में बदले सियासी समीकरण, सत्ता पक्ष के साथ सुर में सुर मिला सकते हैं विपक्षी दल 


चंडीगढ़
पंजाब में बीएसएफ़ का दायरा बढ़ाने के मुद्दे पर सियासी दलों के समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के मुद्दे के बहाने प्रकाश सिह बादल ने विपक्षी दलों की एकता की पहल को भी दावत दी है। एक वक़्त था कि प्रकाश सिंह बादल कांग्रेस को अपनी सबसे बड़ी दुश्मन पार्टी की संज्ञा देते थे, लेकिन अब वो कांग्रेस से हाथ मिलाने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी सियासी दलों से कहना चाहता हूं कि केन्द्र के इस फ़ैसले पर आपस में लड़ना बंद करें और केंद्र ख़िलाफ़ साथ मिलकर लड़ें। BSF के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक सीमा सुरक्षा बल का दायरा बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर पंजाब सरकार ने 25 अक्टूबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर बात करने के लिए वक्त मांगा है। केंद्र के इस फैसले का पंजाब में के लगभग सभी सियासी दल विरोध में हैं।

 शिरोमणि अकाली दल के सबसे वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि यह किसी सियासी पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। शिअद उस पार्टी के का साथ चलने के लिए तैयार है जो केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने भी प्रकाश सिंह बादल के इस बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल के सुझाव में दम है। केंद्र सरकार के इस फ़ैसले पर एकतरफ़ा विचारों से ऊपर उठकर एक साथ मिलकर लड़ाई लड़नी चाहिए। 

 राज्य के अधिकारों में दखलअंदाज़ी आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल सिंह चीमा, भगवंत मान या फिर पंजाब मामलों के सह प्रभारी राघव चड्ढा , सभी इसे संघीय ढांचे को कमजोर करने के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। वहीं हरपाल चीमा ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की बात कही है। वहीं पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री विजयइंदर सिंगला ने इस मुद्दे पर बादल के विरोध का स्वागत करते हुए कहा कहा कि अगर केंद्र के किसी भी मंत्री या प्रधानमंत्री से मिलना है तो कांग्रेस सभी राजनीतिक दलों के शिष्टमंडल की अगुवाई करने के लिए तैयार है। यह सत्ताधारी पार्टी की जिम्मेदारी है और वह सब को साथ लेकर चलेगी। इसमें कोई पक्षपात वाली बात नहीं है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार निहायत तानाशाही ढंग से राज्य के अधिकारों में दखलअंदाजी कर रही है। 

केंद्र सरकार के फैसले का खुलकर विरोध पंजाब में बीएसएफ का दायरा बढ़ाने का मुद्दा दिन पर दिन संवेदनशील होता जा रहा है। बीएसएफ को मिले अधिकार के तहत अब श्री स्वर्ण मंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर और श्री राम तीर्थ में बगैर प्रशासन के इजाज़त के बीएसएफ हस्तक्षेप कर सकता है।

 शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल इसे मुख्य आधार बनाकर केंद्र के खिलाफ लगाता हमलावर हैं। वहीं शिअद नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया भी केंद्र सरकार के फैसले का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेगा। केंद्र का नोटिफिकेशन लागू होते ही हमारे प्रमुख धार्मिक स्थल भी बीएसएफ के दायरे में आ जाएंगे पंजाब के लोगों को यह बात समझना चाहिए। केंद्र सरकार पंजाब के अधिकारों का ज़बरदस्ती हनन कर रही है। 

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