Monday, April 15

हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलने की भी तैयारी अब हो सकता है अटल जंक्शन

हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलने की भी तैयारी अब हो सकता है अटल जंक्शन


भोपाल

देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज नए रूप में बनकर तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को इसका लोकार्पण करेंगे। हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलने की भी तैयारी है। इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार पहले ही प्रपोजल भेज चुकी है। हालांकि, स्टेशन का नाम गृह मंत्रालय बदलेगा। यह तीसरा मौका है जब इसका नाम बदला जा रहा है। इस स्टेशन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हॉस्पिटल, मॉल, स्मार्ट पार्किंग, हाई सिक्योरिटी समेत कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

 

1884 में नवाब की बेगम शाहजहां ने दी थी जमीन
मप्र के 1हजार साल के इतिहास पर लिखी गई किताब 'चौथा पड़ाव' के मुताबिक भोपाल नबाव परिवार की मल्कियत वाली जमीनों में 122.36 किलोमीटर रेलवे लाइन भी थी। होशंगाबाद (नर्मदा नदी के पुल) से भोपाल तक 70.80 किमी रेल लाइन के लिए बेगम शाहजहां ने 1 नवंबर 1884 को जमीन दी थी। इसके लिए उन्होंने अग्रेजी हुकुमत के साथ एग्रीमेंट किया था। जिसके बाद भोपाल स्टेट रेलवे बनाया गया था। जिसमें बेगम ने 50 लाख रुपए दान दिए थे।

हबीबगंज गांव का नाम था
किताब के लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर ने बताया कि हबीबगंज गांव का नाम था। जब रेलवे लाइन बिछाई गई, तब भोपाल-इटारसी के बीच बुधनी, बरखेड़ा, औबेदुल्लागंज और मंडीदीप स्टेशन बनाए गए थे। खासबात यह है कि एग्रीमेंट में उल्लेख किया गया था कि यह रेल लाइन ब्रॉडगेज होगी।

भोपाल से उज्जैन रेल लाइन के लिए भी दी थी जमीन
बेगम शाहजहां ने भोपाल से उज्जैन के बीच 51 किमी रेल लाइन के लिए 1 जनवरी 1891 को जमीन दी थी। उन्होंने जमीन के साथ रेलवे लाइन के लिए 20.80 लाख रुपए भी दिए थे। इतनी ही राशि सिंधिया राजघराने ने दी थी, क्योंकि उज्जैन के हिस्से में उनकी मल्कियत थी।

आजादी के बाद 55 हजार किमी था रेलवे का नेटवर्क
1947 में आजादी के बाद भारतीय रेल का 55 हजार किलोमीटर का नेटवर्क था। 1952 में मौजूदा रेल नेटवर्क को एडमिनिस्ट्रेटिव पर्पज के लिए 6 जोन में डिवाइड किया गया। इसके बाद कई स्टेशन बनाए गए जिनमें हबीबगंज भी शामिल था। 1979 में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया।

कब बना हबीबगंज स्टेशन

मौजूदा रेल नेटवर्क को 1952 में एडमिनिस्ट्रेटिव पर्पज के लिए 6 जोन में डिवाइड किया गया। इसके बाद कई स्टेशन बनाए गए, जिनमें हबीबगंज भी शामिल था। 1979 में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया।

आईएसओ-9001 सर्टिफाइड देश का पहला स्टेशन

हबीबगंज देश में पहला आईएसओ-9001 सर्टिफाइड रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन भारत की पहली सर्टिफाइड ट्रेन शान-ए- भोपाल एक्सप्रेस का हेडक्वार्टर भी है, जहां कई बड़ी ट्रेनों का स्टॉपेज है।

सौ करोड़ खर्च कर बना वर्ल्ड क्लास हबीबगंज स्टेशन

14 जुलाई 2016 को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत रेलवे ने हबीबगंज के मॉडर्नाइजेशन के लिए पहला कॉन्ट्रेक्ट किया। 5 सालों तक चले मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के बाद जुलाई 2021 में हबीबगंज स्टेशन बनकर तैयार हो गया। यहां वर्ल्ड क्लास सुविधाएं हैं। इन पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए तमाम तरह की सुविधाएं देने की कोशिश की गई हैं। आने वाले समय में स्टेशन को ब्रिज के जरिए तैयार हो रहे मेट्रो स्टेशन से भी जोड़ा जाएगा।

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