Saturday, November 26

अगर आपका ब्लूटूथ बार बार ऑन होता है तो सतर्क होजाये

अगर आपका ब्लूटूथ बार बार ऑन होता है तो सतर्क होजाये


उन अहम और मुख्य कनेक्टिविटी विकल्पों में से एक बन गया है जो स्मार्टफोन और कंप्यूटर को कनेक्ट कर सकता है। ब्लूटूथ एक अहम कनेक्टिविटी विकल्प है और यह जानने के बाद, ऑनलाइन हैकर्स धीरे-धीरे ब्लूटूथ कनेक्शन और टारगेट सिस्टम्स को बाधित करने के नए तरीके ढूंढ रहे हैं और नए तरीके लेकर भी आए हैं। हालांकि, इस तरह के अटैक्स का दायरा काफी सीमित है। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्लूटूथ पेयरिंग डिफ़ॉल्ट रूप से एन्क्रिप्टेड होती है। लेकिन क्या हो अगर आपके फ़ोन का ब्लूटूथ आपने ऑन तो कर रखा है लेकिन उसका इस्तेमाल न कर रहे हों।

वैसे तो हमेशा यह सलाह दी जाती है कि जब आपके फोन का ब्लूटूथ उपयोग में न हो तो उसे बंद करके रखें। इसे लेकर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो के रिसर्चर द्वारा एक अध्ययन किया गया है जिसमें ब्लूटूथ को बिना इस्तेमाल ऑन न रखने के अभ्यास का महत्व बताया गया है। इस अध्ययन में एक नए तरीके का उल्लेख किया गया है जिसमें आपके फोन की लोकेशन को ट्रैक करने के लिए ब्लूटूथ ट्रांसमिशन का उपयोग किया जा सकता है। हैरान हो गए न ये जानकार, लेकिन यह सच है।

देखा जाए तो यह धारणा अविश्वसनीय लगती है लेकिन है नहीं। यह सोचने वाली बात है कि ब्लूटूथ को किसी डिवाइस की लोकेशन से कैसे जोड़ा जा सकता है? तो चलिए जानते हैं कि वैज्ञानिक क्या कहते हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि वास्तव में ऐसा करने का एक तरीका है और हैकर्स द्वारा इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है तो यह तरीका बहुत खतरनाक हो सकता है।

ब्लूटूथ से लोकेशन का पता लगाना:

ओरिजनल डिवाइस को ट्रैक करने के लिए ब्लूटूथ का उपयोग कैसे किया जाता है इसके लिए वैज्ञानिकों ने ब्लूटूथ तकनीक के एक विशिष्ट पहलू पर ध्यान केंद्रित किया। यह ब्लूटूथ लो एनर्जी या बीएलई कहा जाता है। बीएलई, ब्लूटूथ का लो एनर्जी फॉर्मेट है जो तुलनात्मकरूप से कम पावर खपत करता है। हालांकि, यह बैंडविड्थ और रेंज से कॉम्प्रोमाइज करके ऐसा करता है।

बिजली की कम खपत के चलते, कई बार 99 प्रतिशत तक बीएलई, डिवाइस के ब्लूटूथ के ऑन रहने तक लगातार सिग्नल संचारित कर सकता है। इसलिए जब वैज्ञानिकों को पता चला कि सिग्नल का एक कॉन्सटैंट सोर्स है जिस पर वे टैप कर सकते हैं, तो केवल एक चीज बचती है और वो है व्यक्तिगत रूप से इन संकेतो के पहचानना। रिसर्चर्स ने तब अलग-अलग डिवाइसेज की पहचान करने पर फोकस किया। हर फोन के सिग्नल में खामियां लगभग बेहद यूनिक पाई गईं। इन भिन्नताओं को अलग करते हुए, शोधकर्ता हर फोन को बेहद ही सटीकता के साथ पहचानने में सक्षम रहे।

रिसर्च के अनुसार, यह पहली बार एंड्रॉइड पुलिस द्वारा देखा गया है। तकनीक के परिणामस्वरूप फॉल्स पॉजिटिव रेट और फॉल्स नेगेटिव रेट 5 फीसद से नीच रहे। Pixel 5 ने 0 प्रतिशत फॉल्स नेगेटिव रेट दिया जिसका मतलब यह है कि इसकी कभी भी गलत पहचान नहीं की गई। इसका सीधा मतलब है कि इसकी एक्सूयरेसी एकदम सटीक है।

आखिर क्या है इसका मतलब:

इस रिसर्च का मतलब या सार यह है कि अगर ब्लूटूथ को ऑन रखते हैं तो आपके फोन के ब्लूटूथ का उपयोग आपको ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि,, इस प्रकार के लोकेशन ट्रैकिंग की बहुत अधिक सीमाएं हैं। सबसे पहले, इस सिस्टम को आपके पास और एक स्टेबल वातावरण में काम करना होगा। क्योंकि कई कारकों के परिणामस्वरूप रिकॉर्डिंग में गड़बड़ी होने की संभावना बनी रहती है या गड़बड़ी हो सकती है। इसके अलावा, इन बीएलई सिग्नल्स में खामियां हमेशा यनिक नहीं होता हैं। इसका मतलब यह है कि कुछ डिवाइस ऐसे हैं जो एक जैसे सिग्नल उत्पन्न कर सकते हैं और इसलिए व्यक्तिगत रूप से पहचाना नहीं जा सकता है।

भले ही, इस रिसर्च ने हैकर्स के प्लान को खोल दिया है कि वो इस तरह से यूजर्स की लोकेश का पता लगाते हैं। लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि ब्लूटूथ में जो एन्क्रिप्शन दिया गया है वो भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। क्योंकि हैकर्स इसे डीकोड करने की कोशिश नहीं कर सकते हैं। लोकेश को ट्रैक करने के लिए, उन्हें बीएलई सिग्नल्स को इकट्ठा करना होगा और उन्हें एक फोन से पहचानना होगा। ब्लूटूथ द्वारा आदान-प्रदान की जा रही जानकारी को डिक्रिप्ट करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

किसी भी मामले में, इसके खिलाफ एक सीधा और प्रभावी समाधान यह है कि जब जरूरत न हो तो ब्लूटूथ को ऑफ करके रखें।

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