Saturday, March 2

कोरोना के बीच बीजेपी का हाईटेक वर्चुअल प्रचार और कांग्रेस पुराने ढर्रे पर


भोपाल. एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी लोगों से जुड़े रहने के लिए हाईटेक प्रचार में लगी है और यह हाईटैक वर्चुअल रैली का आइडिया उसने अमेरिका से चुराया है। अब जरूरी यह है कि बीजेपी को वर्चुअल प्रचार की जरूरत क्यों पड़ी ? इसकी तीन वजह हैं। पहली, पीएम नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष कोरोना काल के दौरान पूरा हुआ और लॉकडाउन में उनकी उपलब्धियां लोगों तक पहुंचाने के लिए वर्चुअल रैली से प्रचार करना उनकी मजबूरी बन गया। दूसरा और तीसरा कारण है, इस साल के अंत में पश्चिम बंगाल और बिहार में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ मध्यप्रदेश में सत्ता कायम रखने के लिए उपचुनाव जीतना।
यही वजह है कि गुरुवार 25 जून को बीजेपी ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से “मध्यप्रदेश जनसंवाद रैली” को वर्चुअल तरीके से आयोजित किया। इस दौरान लाखों लोगों ने विभिन्न माध्यमों के जरिए बीजेपी के नेताओं के भाषण सुने। बीजेपी का दावा है कि वह लगभग 1 करोड़ लोगों से इस रैली के जरिए जुड़ी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली से संबोधित किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और अन्य भाजपा नेताओं ने इसे भोपाल में संबोधित किया और सुना भी।
क्या है  वर्चुअल रैली…
वर्चुअल रैली में संबोधन एक कमरे में बैठकर भी दिया जा सकता है। हाल ही में 25 मई को अमेरिकी पॉलिटिशयन बर्नार्ड सैंडर्स ने वर्चुअल रैली का इस्तेमाल किया। दरअसल, कोरोना की वजह से देश भर में सोशल डिस्टेंस रखा जा रहा है। राजनीतिक दलों को चुनाव में देरी और अपने अभियानों को लोगों तक पहुंचाना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में विदेशों में वर्जुअल रैली काफी प्रभावी है और अब भाजपा भी इसी मॉडल को आगे बढ़ा रही है।
वर्चुअल रैली ऑनलाइन किसी भी वेब पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। इसमें सदस्यों को एक तय समय और तिथि पर आमंत्रित किया जाता है। इस दौरान ऑनलाइन वर्चुअल रैली के माध्यम से सब एकत्रित होते हैं और कोई एक अपनी बात रखता है, बाकी सदस्य उसे ऑनलाइन सुनते हैं। लॉकडाउन के दौरान मोदी सरकार ने वर्चुअल रैली के जरिए 10 करोड़ घरों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। भाजपा वर्चुअल रैलियों के जरिये प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान, 20 लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज, कोविड-19 से जुड़े विषयों सहित जन कल्याण कार्यो के बारे में लोगों को बता रही है।
25 जून को हुई बीजपी की वर्चुअल रैली को ट्वीटर, फेसबुक और विभिन्न वेबसाइटों के जरिए जोड़ा गया। कुछ टीवी चैनलों ने इसे लाइव प्रसारित भी किया। यह सब वर्चुअल रैली के अंतर्गत ही आता है। हालांकि, मध्यप्रदेश की सीएम शिवराज सिंह चौहान के ट्विटर पर इस रैली को सिर्फ 6 हजार 200 लोगों ने देखा, जबकि बीजेपी के मध्यप्रदेश के फेसबुक पेज पर 2 लाख 53 हजार व्यूज हैं और इसे 4 हजार 200 लोगों ने शेयर किया है। ऐसे अलग-अलग सोशल साइट्स के पेज की संख्या को अगर काउंट किया जाए तो यह करोड़ तक जा सकती है। जैसे, बीजेपी से राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे अपने ट्विटर पर शेयर किया तो वहां पर लगभग 14 हजार लोगों ने इसे लाइव देखा।
कांग्रेस सुस्त…
बीजेपी जहां हाईटैक प्रचार में लगी है। वहीं कांग्रेस पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। पेट्रोल-डीजल के मुद्दे पर कांग्रेस ने पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन जरूर किया, लेकिन वह जनता को जोड़ने में कामयाब नहीं हो सकी। मध्यप्रदेश में साइकिल से लेकर बैलगाड़ी या हाथठैले पर बाइक को रखकर सड़कों पर दिखी जरूर, लेकिन आम लोगों को नहीं जोड़ पाई। लॉकडाउन के चलते 150 लोगों को लेकर सड़कों पर साइकिल चलाना राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को महंगा पड़ गया और उनके खिलाफ उल्टा बीजेपी ने एफआईआर करा दी।

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