Monday, April 15

एमएसएमई विकास नीति से बनेगा आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश

एमएसएमई विकास नीति से बनेगा आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश


भोपाल

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशाअनुरूप एमएसएमई विकास नीति – 2021 घोषित की है। नीति का उद्देश्य छोटे-छोटे उद्योगों को रियायतें और सुविधाएं देकर मध्यप्रदेश को आत्म-निर्भर बनाना तथा स्थानीय युवाओं के कौशल उन्नयन के साथ उन्हें प्रदेश में ही रोजगार मुहैया करवाना है।

एमएसएमई विकास नीति की जानकारी देते हुए विभाग के सचिव और उद्योग आयुक्त पी. नरहरि ने बताया कि अन्य उद्यमों के साथ मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर को संगठित कर उनका औद्योगिक उत्पादन बढ़ाकर प्रदेश को आत्म-निर्भर बनाना है। नरहरि ने बताया कि नवीन टेक्सटाईल इकाई विनिर्माण श्रेणी की एमएसएमई, जिसमें यंत्र -संयंत्र में 10 करोड़ रुपये से अधिक एवं 50 करोड़ रुपये तक का निवेश किया गया हो, को संशोधित टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फण्ड स्कीम (ATUF) में अनुमोदित प्लांट एवं मशीनरी के लिए, लिए गए टर्म लोन पर वाणिज्यिक उत्पादन दिनांक से विभिन्न श्रेणियों में ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा।

नीति अनुसार 25 करोड़ तक के स्थाई पूंजी निवेश वाली नवीन इकाई के लिए पांच वर्ष के लिए ब्याज अनुदान 2 प्रतिशत की दर से रूपए 5 करोड़ की सीमा तक दिए जाने का प्रावधान है। इसी तरह रूपए 25 करोड़ से अधिक के स्थाई पूंजी निवेश वाली नवीन इकाई के लिए या विद्यमान स्वतंत्र इकाई, जिसके द्वारा विस्तार, शवलीकरण हेतु अमेण्डेड टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फण्ड स्कीम अंतर्गत अनुमोदित प्लांट एवं मशीनरी में विद्यमान स्थाई पूंजी निवेश का कम से कम 30 प्रतिशत, जो रूपए 25 करोड़ से कम नहीं हो या रूपए 50 करोड़, जो भी कम हो, नवीन निवेश किया हो, तो 5 वर्ष के लिए 5 प्रतिशत की दर से ब्याज अनुदान का प्रावधान किया गया है। नवीन कम्पोजिट इकाई, जिसके द्वारा रूपए 25 करोड़ से  अधिक का स्थायी पूंजी निवेश किया गया हो और विद्यमान स्वतंत्र इकाई के शवलीकरण से निर्मित कम्पोजिट इकाई को 5 वर्ष के लिए 7 प्रतिशत की दर से ब्याज अनुदान की सुविधा दिए जाने का प्रावधान है।

किसी इकाई को बिना उसके कार्यस्थल के दृष्टिगत, यानि कार्यस्थल मध्यप्रदेश राज्य के अंदर एक ही स्थान पर या विभिन्न स्थानों पर हो सकता है, को कम्पोजिट इकाई, जो डाउनस्ट्रीम गतिविधियों के इनपुट के रूप में प्राथमिक उत्पाद जैसे यार्न का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग करती हो, होना चाहिए। विशेष पैकेज का लाभ प्राप्त करने वाली इकाई इस नीति अंतर्गत घोषित अन्य शेष सुविधाएँ, जो समान प्रकार की न हों, पात्रतानुसार प्राप्त कर सकेंगी।

 

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