Friday, February 3

आखिर कब तक,फिल्मी मायाजाल में नेपोटिजम बरकारार रहेगा……

आखिर कब तक,फिल्मी मायाजाल में नेपोटिजम बरकारार रहेगा……


बिहार के पटना में जन्मा एक चमकता सितारा,जिसके उजाले की चमक न सिर्फ टेलीविजन इंडस्ट्री में रही बल्कि बिना किसी गॉडफादर के बड़े परदे पर अपनी चमक छोड़ने वाला उजला सितारा…तड़क-भड़क की इस दुनिया से अंधियारे में जाता गया….अंधियारा भी ऐसा जिसके अगाध तक चले जाना आसान नही था…जहां से सब कुछ धुंधला और अंधरकारमय नजर आता हो….और शायद इसलिए तो वो झिलमिलाता,आशायुक्त नौजबान उम्मीदों और आस में दुनिया से ही चला गया…..

खैरियत पूछो कभी तो कैफियत पूछो तुम्हारे बिन दीवाने का क्या हाल है, दिल मेरा देखो ना मेरी हैसियत पूछो कुछ ऐसी ही परिस्थिति शयाद सुशांत की थी…..क्योंकि इस प्रतिस्पर्धात्मक फिल्मी दुनिया में सिर्फ हैसियत को तब्बजों दी जाती है…..नेपोटिजम से भरी दूर से दिखने वाली यह दुनिया इतनी मतलबी हो गई के उसने इस उजियाले को अंधकार तक पहुंचा दिया…..

बैकग्रांउड डांसर से फिल्मों में स्टार बनने वाला लड़का जिसका न कोई गॉडफादर रहा न कोई स्ट्रांग सपोर्टर,जो पढ़ाई से लेकर हर क्षेत्र में अव्वल था,जो अंतरिक्ष जाने की बातें किया था,जो स्ट्रॉग रिलेशनसिप टूटने के बाद नही टूटा….उसे फिल्मी दुनिया के मायाजाल ने तोड़  डाला…

फिल्मों और कहानियों में सुना है के राजा का बेटा ही राजा बनेगा…..यह कहावत इस नेपोटिजम से भरे फिल्मी मायाजाल ने सच कर दी..तभी सुशांत जैसा होनहार,काबिल लड़का स्ट्रगल और असफलता के भय से इतना डर गया के उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा डाला….अब सवाल यही है के कब तब हीरो का बेटा ही शान ओ-शौकत बटोरता रहेगा…कब तक छोटे परिवारों से आए मेहनती लोगों को यूं ही मानसिक रूप से परेशान किया जाएगा…और कब तक सुशांत जैसे चमकते सितारे खुद को अंधियारे में डालते रहेंगे…आखिर कब तक?

 

 

 

Story by-Neha Yadav

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