Saturday, April 20

प्रतापगढ़ का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प, मां के खिलाफ बेटी ने नहीं उतारा उम्मीदवार, भाजपा को करी सीट ऑफर 

प्रतापगढ़ का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प, मां के खिलाफ बेटी ने नहीं उतारा उम्मीदवार, भाजपा को करी सीट ऑफर 


लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ एक ही परिवार के दो लोग अलग-अलग दलों से चुनावी मुकाबले में ताल ठोंकते दिख रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ एक मां जैसे ही विपक्षी गठबंधन से उम्मीदवार बनी, बेटी ने अपनी पार्टी का उम्मीदवार उनके खिलाफ नहीं उतारने का निर्णय लिया है। अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल के परिवार में यह मामला सामने आया है। प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से अपना दल (के) के टिकट पर कृष्णा पटेल ने नामांकन दाखिल किया है। इसको देखते हुए अपना दल (एस) ने इस सीट से उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है। अनुप्रिया पटेल ने इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी को जानकारी दे दी है। अब भाजपा इस सीट से उम्मीदवार उतार सकती है।

अपना दल (के) ने इस विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। इस गठबंधन के तहत पार्टी की उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल का प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। एनडीए के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर यह सीट अपना दल (एस) के पाले में गई थी। मां के चुनावी मैदान में उतरने से सोनेलाल पटेल के परिवार में विवाद बढ़ने की आशंका गरमाने लगी। मंगलवार को कृष्णा पटेल ने इस सीट से नामांकन कर दिया। इसके बाद अनुप्रिया पटेल ने सहयोगी दल भाजपा को यह सीट देने का फैसला ले लिया। इस संबंध में दोनों पार्टियों के बीच बातचीत होने की भी बात कही जा रही है।

2015 में हुआ था मां-बेटी में अलगाव
डॉ. सोनेलाल पटेल के निधन के बाद अपना दल में बर्चस्व स्थापित करने की कोशिश लगातार चलती रही है। बेटी अनुप्रिया पटेल वर्ष 2014 में सांसद बनने के बाद केंद्र की राजनीति में चली गई तो मां कृष्णा पटेल ने उनकी जगह लेने की कोशिश की। हालांकि, चुनाव में हार के बाद कृष्णा पटेल और अनुप्रिया पटेल के बीच तकरार बढ़ने लगी। अपना दल में वर्ष 2105 में अलगाव हो गया। पहली बार दोनों दल इस चुनाव में आमने सामने आ गए हैं।

उम्मीदवार तय करने के बाद बदली स्थिति
अपना दल (एस) की ओर से पहले से प्रतापगढ़ सीट के लिए उम्मीदवार का ऐलान किया जा चुका था। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र प्रसाद को यहां से उम्मीदवार बनाया गया। अनुप्रिया पटेल की ओर से इस सीट से अपनी पार्टी का उम्मीदवार नहीं खड़ा करने का निर्णय लेने से पहले ही वे नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं। उनका कहना है कि 26 जनवरी को पार्टी नेतृत्व ने हमें चुनाव लड़ने और नामांकन पत्र खरीदने को कहा था। हमने नामांकन फॉर्म दाखिल किया है। हालांकि, एक घंटे बाद में हमें पता चला कि भाजपा को यह सीट दे दी गई है। पार्टी की ओर से भी किसी ने नामांकन दाखिल किया है।

भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र मौर्य के नामांकन दाखिल किए जाने की जानकारी है। ऐसे में अपना दल (एस) के उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि मेरी पार्टी के किसी ने भी अब तक मुझसे संपर्क नहीं किया है। मैंने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया है। मेरी अभी वापस लेने की कोई योजना नहीं है। प्रतापगढ़ में पांचवें चरण में मतदान होना है। इसके लिए 11 फरवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख है।

प्रवक्ता ने उम्मीदवार हटाने की जानकारी
अपना दल (एस) के प्रवक्ता राजेश पटेल ने उम्मीदवार को वापस लेने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को जब जानकारी मिली कि उनकी मां कृष्णा पटेल प्रतापगढ़ से चुनावी मैदान में उतरी हैं तो उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार को वापस लेने और सीट बीजेपी को सौंपने का फैसला किया। अनुप्रिया जी अपनी मां के खिलाफ उम्मीदवार नहीं खड़ा करना चाहती हैं। उन्होंने राजनीति पर संबंधों को प्राथमिकता दी। राजेंद्र प्रसाद के नामांकन पर पटेल ने कहा कि उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए कहा जाएगा। पार्टी उन्हें चुनाव चिह्न नहीं देगी।

अंतिम समय में जानकारी के बाद तय हुआ उम्मीदवार
भाजपा के प्रतापगढ़ जिलाध्यक्ष हरिओम मिश्रा ने कहा कि अपना दल (एस) ने हमें आखिरी समय में सूचित किया कि वह चुनाव नहीं लड़ेगी, क्योंकि कृष्णा पटेल चुनाव लड़ रही हैं। बहुत कम समय में भाजपा ने जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र मौर्य को मैदान में उतारने का फैसला किया गया। हालांकि, अनुप्रिया पटेल के इस निर्णय पर भी करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कायरों और गद्दारों को त्यागी बनने की जरूरत नहीं है। अपना दल (के) के महासचिव पंकज निरंजन ने कहा कि निश्चित तौर उन्होंने हार के डर से उम्मीदवार वापस लिया। अनुप्रिया की बहन पल्लवी पटेल सिराथु से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।

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