Thursday, February 9

फिर होगी सीमा वार्ता भारत और चीन के बीच, हॉट स्प्रिंग्स पर ड्रैगन का अड़ियल रवैया होगा खत्म?

फिर होगी सीमा वार्ता भारत और चीन के बीच, हॉट स्प्रिंग्स पर ड्रैगन का अड़ियल रवैया होगा खत्म?


 नई दिल्ली 
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर साल भर से चल रहे गतिरोध का अंत अभी भी नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, दोनों देश एक बार फिर से बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। 13वें दौर की वार्ता फेल होने के बाद एक बार फिर से भारत और चीन बैठक करने को राजी हुए हैं। भारत और चीन 10 अक्टूबर को 13वें दौर की वरिष्ठ कमांडरों की बैठक से उत्पन्न गतिरोध को हल करने के लिए इसी महीने सीमा मामलों पर वर्किंग मेकैनिज्म फॉर कंसल्टिंग एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की एक और बैठक आयोजित करने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, बैठक की तारीखों को अब भी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

नई दिल्ली और बीजिंग में स्थित अधिकारियों के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अड़ियल रवैये के कारण, डब्लूएमसीसी को डेपसांग बुलगे और चार्डिंग नाला जंक्शन (सीएनजे), डेमचोक में भारतीय सेना के लिए गश्त के अधिकार को बहाल करने और डिसइंगेजमेंट करने में काफी मशक्कत करनी होगी। बैठक के दौरान हॉट स्प्रिंग्स के मसले को सुलझाने पर फोकस होगा। बता दें कि लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स इलाके में पैट्रोलिंग पॉइंट 15 (पीपी 15) पर भारत और चीन की सेनाएं अभी भी एक दूसरे के सामने डटी हुई है।

इस गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर पर बातचीत के 13 दौर हो चुके हैं। 13वें दौर की बैठक 10 अक्टूबर को हुई थी, मगर यह विफल रहा था। माना जाता है कि सैन्य कमांडरों की 13वें दौर की बैठक के दौरान चीनी सेना यानी पीएलए ने हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में विघटन को हल करने के लिए अर्ध-उपायों का सहारा लिया और स्थायी ठिकानों पर वापस जाने या अप्रैल 2020 की यथास्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया। बता दें कि मई 2020 में पीएलए ने भारी संख्या में सैनिकों का उपयोग करते हुए लद्दाख में 1597 किलोमीटर वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ अस्वीकृत 1959 लाइन को लागू करने के लिए पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो, गलवान, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स के उत्तरी तट पर जमीन की स्थिति को एकतरफा बदल दिया था, जिसका भारत विरोध करता आया है। 
 
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इसके बाद सोमवार 11 अक्टूबर को दोनों पक्षों ने अलग अलग बयान जारी कर एक दूसरे पर बातचीत के विफल होने का आरोप लगाया। भारत ने कहा कि यथास्थिति को बदलने की चीन की एकतरफा कोशिशें गतिरोध के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि चीन का कहना था कि भारत को बड़ी मुश्किल से हासिल की गई मौजूदा स्थिति को संजो कर रखना चाहिए। फरवरी में दोनों पक्षों ने पैंगोंग सो झील के पास से कुछ इलाकों से अपनी अपनी सेनाओं को पीछे ले लेने का निर्णय लिया था। हॉट स्प्रिंग्स, डेपसांग तराई और डेमचोक इलाकों में ऐसा अभी तक नहीं हो पाया है।

'एकतरफा कोशिशें'
भारत के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, "बैठक में भारतीय पक्ष ने बाकी बचे इलाकों के समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव दिए लेकिन चीनी पक्ष ने उन्हें स्वीकार नहीं किया और अपनी तरफ से भविष्य की तरफ देखने वाला कोई प्रस्ताव भी नहीं दिया"। वहीं चीन की सेना पीएलए के पश्चिमी कमांड के प्रवक्ता लॉन्ग शाओहुआ ने कहा, "भारतीय पक्ष अनुचित और अवास्तविक मांगों पर अड़ा रहा जिसकी वजह से बातचीत मुश्किल हो गई" लॉन्ग ने यह भी कहा कि "स्थिति का गलत आकलन करने की जगह भारतीय पक्ष को मुश्किल से हासिल की हुई इस स्थिति को संजो कर रखना चाहिए"। फरवरी में दोनों पक्षों ने पैंगोंग सो झील के पास से कुछ इलाकों से अपनी अपनी सेनाओं को पीछे ले लेने का निर्णय लिया था। हॉट स्प्रिंग्स, डेपसांग तराई और डेमचोक इलाकों में ऐसा अभी तक नहीं हो पाया है।

पहली बार हुआ था ऐसा
इससे पहले जब भी बातचीत बेनतीजा रही है, तब दोनों पक्षों ने इसके बारे में साझा बयान जारी किए हैं। यह पहली बार है जब इस तरह के अलग अलग और एक दूसरे पर आरोप लगाने वाले बयान जारी किए गए हैं। पीपी 15 पर एलएसी के पार भारत के इलाके के अंदर अभी भी चीनी सेना की एक टुकड़ी तैनात है। भारत का दावा है कि चीन भारत को उत्तर में स्थित डेपसांग तराई में अपने ही पांच पैट्रोलिंग बिंदुओं तक नहीं पहुंचने दे रहा है। डेपसांग तराई भारतीय वायु सेना के दौलत बेग ओल्डी हवाई अड्डे के पास स्थित है, इसलिए यह भारत के लिए काफी संवेदनशील है। 

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