Saturday, December 3

बढ़े बिजली बिल पर फौरी राहत देने की कोशिश, 6 किश्तों में देना होगा फिक्स चार्ज

बढ़े बिजली बिल पर फौरी राहत देने की कोशिश, 6 किश्तों में देना होगा फिक्स चार्ज


बिजली के बढ़े बिलों में राहत देने की कोशिश, 5 माह बाद 6 किश्तों में वसूलेंगे फिक्स चार्ज

अप्रैल और मई में बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत और पिछले साल की मीटर रीडिंग के आधार पर बिल भेजने के बाद हुई गड़बड़ी को सरकार सुधारने की कोशिश में जुट गई है। इसके लिए सरकार ने फौरी तौर पर कुछ राहत जरुर दी है। लॉकडाउन में घरेलू उपभोक्ताओं को मिले बिजली के बिल अब आधे हो जाएंगे। दुकान, बड़े-छोटे उद्योग, शोरूम, अस्पताल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन, पार्लर और ऐसे ही बंद रही दुकानों से अप्रैल से जून माह तक के बिजली बिलों पर फिक्स चार्ज फिलहाल नहीं लिया जाएगा। यानि बिजली कंपनी ये राशि वसूलेगी तो जरुर लेकिन पांच महीने बाद। सरकार ने ये तय किया है कि फिक्स चार्ज की राशि अक्टूबर 2020 से लेकर मार्च 2021 तक छह समान किस्तों में बिना ब्याज के जमा की जा सकेगी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रविवार को बिजली बिलों में राहत देने का दावा करते हुए बताया कि इससे लगभग 12 लाख उपभोक्ताओं को लाभ होगा। फिक्स चार्ज वाली राशि करीब 700 करोड़ रुपए है।

उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन स्कीम

उपभोक्ता यदि अप्रैल और मई के बिलों का भुगतान तय तिथि पर करते हैं तो उन्हें 1 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जो कि घरेलू के लिए अधिकतम 10,000 रुपए और उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिए एक लाख रुपए तक होगी। सभी थ्री फेस उपभोक्ताओं को लॉकडाउन की अवधि में आवेदन देने के 7 दिन बाद से कॉन्ट्रैक्ट डिमांड में कमी की सुविधा दी गई थी। यह सुविधा लॉकडाउन समाप्त होने के 15 दिन बाद तक की अवधि के लिए लागू रहेगी।

सौ रु में सौ यूनिट बिजली पर संशय

हालांकि इस घोषणा में ये बात शामिल नहीं है कि पूर्व की कमलनाथ सरकार की सौ रुपये में 100 यूनिट बिजली देने की योजना जारी रहेगी या नहीं। इसके साथ ही जिन उपभोक्ताओं ने अप्रैल और मई के बिल में ज्यादा राशि जमा की है उसे किस तरह समायोजित किया जाएगा। दरअसल कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि उन्हें पिछले साल के बिल के आधार पर इस साल भी बिल भेजे गए जबकि इस साल उनकी विद्युत खपत कम थी। हालांकि विद्युत विभाग का कहना है कि ऐसे बिल की जांच की जाएगी और राशि का समायोजन किया जाएगा।

 

EDIT: DIPESH JAIN

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